टॉल प्लाजा गोलीबारी मामला बना राजनीतिक संग्राम, प्रमोद सिंह ने लगाए गंभीर आरोप

  • Post By Admin on Jun 07 2026
टॉल प्लाजा गोलीबारी मामला बना राजनीतिक संग्राम, प्रमोद सिंह ने लगाए गंभीर आरोप

लखीसराय: कथित टॉल प्लाजा गोलीबारी मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले में आरोपी बनाए गए प्रमोद सिंह ने कैमरे के सामने आकर पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि गोलीबारी जैसी कोई घटना हुई ही नहीं, बल्कि पंचायत चुनाव में संभावित हार के डर से उन्हें राजनीतिक रूप से रास्ते से हटाने की साजिश रची गई है।

प्रमोद सिंह ने कहा कि घटना की रात वह टॉल प्लाजा के समीप एक चाय दुकान पर बैठे हुए थे। इसी दौरान गौतम कुमार उर्फ भोपू और पंचायत मुखिया अनिल कुमार सिंह उर्फ मखरू सिंह अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और उन्हें डराने-धमकाने तथा जान से मारने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी तरह वहां से निकलने के बाद विरोधी पक्ष के लोग उनके घर तक पहुंचे और गाली-गलौज की।

उन्होंने कथित गोलीबारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि टॉल प्लाजा पर फायरिंग हुई थी तो अब तक सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उनके अनुसार, मामले में सबूत होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट वीडियो सामने नहीं आया है। प्रमोद सिंह ने अपने परिवार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब वह जेल गए थे तब उनके परिवार में तीन भाई थे, लेकिन उनके जेल जाने के बाद दो भाइयों की हत्या कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने समाजहित में अपनी निजी जमीन रास्ते के लिए दान दी थी, जिससे क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता बढ़ी और विरोधी पक्ष पंचायत चुनाव में हार की आशंका से घबरा गया। प्रमोद सिंह के अनुसार, विरोधी जनप्रतिनिधि अपने बेटे को राजनीतिक रूप से स्थापित करने के उद्देश्य से उन्हें फंसाने का प्रयास कर रहे हैं।

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। प्रमोद सिंह ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आने पर “दूध का दूध और पानी का पानी” हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि घटनास्थल के आसपास मौजूद ग्रामीणों, दुकानदारों एवं प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। इस बीच क्षेत्र में यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकेगी।