लखीसराय में खुदाई के दौरान निकला प्राचीन शिवलिंग, पालकालीन धरोहर होने के संकेत
- Post By Admin on Jun 05 2026
लखीसराय : लखीसराय जिले के हलसी प्रखंड अंतर्गत कैदी पंचायत के मानपुर गांव स्थित बड़की पोखर की खुदाई के दौरान एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक शिवलिंग मिलने से क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है। शिवलिंग मिलने की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग स्थल पर पहुंचने लगे और इसे धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व की खोज के रूप में देखा जा रहा है।
प्रारंभिक पुरातात्विक एवं भौगोलिक आकलन के आधार पर इस शिवलिंग को 9वीं से 12वीं शताब्दी ईस्वी के बीच का माना जा रहा है, जो ऐतिहासिक पाल काल से संबंधित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत पर नई रोशनी डाल सकती है। इस संबंध में लखीसराय संग्रहालय के वरीय तकनीकी सहायक राजेश कुमार ने बताया कि प्राप्त शिवलिंग का स्वरूप और निर्माण शैली ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि यह संभवतः किसी बड़े शिवलिंग का भग्नावशेष (खंडित हिस्सा) है, जो लंबे समय तक मिट्टी के नीचे दबा रहने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार शिवलिंग का निचला भाग चौकोर अथवा अष्टकोणीय आकार का है, जबकि ऊपरी हिस्सा बेलनाकार स्वरूप में निर्मित है। इसके ऊपर सूक्ष्म नक्काशी और धारियों के चिन्ह भी दिखाई देते हैं, हालांकि वर्षों तक मिट्टी के नीचे दबे रहने और प्राकृतिक घर्षण के कारण इसकी बारीक कलात्मक विशेषताएं स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही हैं।
राजेश कुमार ने बताया कि लखीसराय और आसपास का क्षेत्र पालकालीन संस्कृति और स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। पाल शासकों के काल में बौद्ध धर्म के साथ-साथ शैव और वैष्णव परंपराओं से जुड़ी अनेक कलाकृतियों का निर्माण हुआ था। इसी आधार पर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि प्राप्त शिवलिंग काले ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित पालकालीन शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण हो सकता है। स्थानीय लोगों ने इस ऐतिहासिक खोज को संरक्षित करने और इसके विस्तृत पुरातात्विक अध्ययन की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक जांच और विस्तृत अध्ययन के बाद इस शिवलिंग के वास्तविक कालखंड और ऐतिहासिक महत्व के बारे में और अधिक जानकारी सामने आ सकेगी।