पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बने डॉ. मनोज चौधरी, बिहार सरकार ने किया सम्मानित

  • Post By Admin on Jun 07 2026
पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बने डॉ. मनोज चौधरी, बिहार सरकार ने किया सम्मानित

लखीसराय : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में लखीसराय जिले के वरिष्ठ शिक्षक एवं पर्यावरण संरक्षक डॉ. मनोज कुमार चौधरी को ‘पर्यावरणविद् सम्मान’ से सम्मानित किया गया। पटना के जे.पी. गंगा पथ स्थित सम्राट उद्यान में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।

डॉ. मनोज कुमार चौधरी वर्तमान में मुंगेर वन प्रमंडल क्षेत्रांतर्गत बड़हिया प्रखंड के उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खुटहा में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। राज्य सरकार द्वारा मिला यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों की सार्वजनिक स्वीकृति भी है। सम्मान की घोषणा के बाद लखीसराय, मुंगेर वन प्रमंडल और शिक्षा जगत में हर्ष का माहौल है।

15 हजार से अधिक पौधों के रोपण और संरक्षण में निभाई अग्रणी भूमिका

डॉ. चौधरी ने विद्यालय को केवल शिक्षण संस्थान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सामाजिक परिवर्तन और पर्यावरणीय चेतना के केंद्र के रूप में विकसित किया। पिछले लगभग एक दशक में उन्होंने वन विभाग के सहयोग से 15 हजार से अधिक पौधों के वितरण, रोपण और संरक्षण अभियान का संचालन किया। इस अभियान से छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों को जोड़ा गया।

उनकी प्रेरणा से हजारों विद्यार्थियों ने अपने-अपने गांवों में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। विद्यालय परिसर में भी 500 से अधिक पौधों का रोपण एवं संरक्षण किया गया, जिनमें लगभग 300 पौधों को सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया गया। उनके नेतृत्व में विद्यालय परिसर हरियाली और स्वच्छता का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा को बनाया जनआंदोलन

डॉ. चौधरी ने पर्यावरण संरक्षण को केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने विद्यालय स्तर पर स्वच्छता अभियान, प्लास्टिक मुक्त परिसर, जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण, कचरा प्रबंधन, ऊर्जा बचत और पर्यावरण शिक्षा से संबंधित अनेक गतिविधियों का सफल संचालन किया।

विद्यार्थियों को पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए रैलियां, शपथ ग्रहण कार्यक्रम, चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिताएं, संगोष्ठियां, जागरूकता अभियान और विशेष सभाओं का आयोजन कराया गया। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने पर्यावरण, जल संरक्षण, स्वच्छता और स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार कीं तथा राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

शिक्षक के साथ समाज निर्माता की भूमिका

डॉ. चौधरी का योगदान केवल शिक्षा और पर्यावरण तक सीमित नहीं है। उन्होंने सामाजिक जागरूकता, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और प्रशासनिक दायित्वों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। वे पिछले लगभग 19 वर्षों से विभिन्न चुनावों में मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य कर रहे हैं। पंचायत चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक विभिन्न स्तरों पर उन्होंने प्रशिक्षण और जनजागरूकता गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने विभिन्न सरकारी अभियानों में भी जन-जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाई और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर एक सामाजिक आंदोलन का रूप देने का प्रयास किया।

सम्मान पूरे जिले और पर्यावरण प्रेमियों को समर्पित

राजकीय समारोह में सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि उन विद्यार्थियों, सहकर्मी शिक्षकों, अभिभावकों, वन विभाग, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों का भी सम्मान है, जिन्होंने वर्षों तक उनके साथ मिलकर हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य किया।

उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण कोई विकल्प नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की अनिवार्य आवश्यकता है। यदि हम आज प्रकृति को बचाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य दे सकेंगे।

लखीसराय के लिए गौरव का क्षण

डॉ. चौधरी को मिले इस राज्यस्तरीय सम्मान पर जिले के शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। विभिन्न संगठनों ने इसे पूरे लखीसराय जिले के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि उनके कार्य युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके सतत प्रयासों को मिली यह राज्यस्तरीय पहचान इस बात का प्रमाण है कि समर्पण, नवाचार और जनभागीदारी के माध्यम से सकारात्मक बदलाव संभव है। उनका संदेश है—“एक वृक्ष सौ पुत्र समान” और “प्रकृति की रक्षा ही भविष्य की सुरक्षा है।”