सूर्यगढ़ा में धूमधाम से मनाई गई आधुनिक हिंदी के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र की 176वीं जयंती

  • Post By Admin on Sep 09 2026
सूर्यगढ़ा में धूमधाम से मनाई गई आधुनिक हिंदी के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र की 176वीं जयंती

सूर्यगढ़ा : स्थानीय +2 परियोजना बालिका उच्च विद्यालय सूर्यगढ़ा में हिंदी नवजागरण के अग्रदूत, आधुनिक हिंदी के पितामह और गद्य के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र की 176वीं जयंती गरिमामय वातावरण में मनाई गई। यह आयोजन साहित्य सेवी प्रेमरंजन कुमार के कुशल दिशा-निर्देश में संपन्न हुआ।

समारोह के दौरान विद्यालय के प्रधान संजय कुमार सिंह ने भारतेंदु जी की बहुमुखी गद्य-विधा पर विस्तृत प्रकाश डाला और उनके योगदान को रेखांकित किया। वहीं, साहित्य सेवी प्रेमरंजन कुमार ने भारतेंदु युग की विशेषताओं के साथ-साथ उनकी कालजयी रचनाओं 'भारत दुर्दशा' और 'अंधेर नगरी' की समसामयिक प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।

वक्ताओं ने उल्लेख किया कि खड़ी बोली के विकास में भारतेंदु जी का योगदान ऐतिहासिक और अतुलनीय रहा है। उनकी प्रसिद्ध काव्य पंक्तियाँ "निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को शूल" आज भी मातृभाषा के विकास का मूल मंत्र हैं। इसके अलावा व्यंग्य नाटक 'अंधेर नगरी' की चर्चित पंक्तियों "अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर खाजा टके सेर भाजा" के हवाले से उनके हास्य-व्यंग्य, प्रहसन, नाटक, कविता, गद्य और पद्य पर संपूर्ण एकाधिकार को याद किया गया। सभा में यह भी रेखांकित किया गया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोने के लिए भारतेंदु जी के भाषाई विचारों और मूल मंत्र को अपनाया था। इस जयंती समारोह के अवसर पर अनिल सर, रवि कुमार रवि, कृष्णमुरारी, शिशिर कुमार, विक्रांत कुमार और मो. मुसकीम सर सहित कई शिक्षक व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।