भगवान श्रीकृष्ण के छठी उत्सव और अन्नप्राशन पर पर्यावरण भारती ने किया पौधारोपण

  • Post By Admin on Sep 09 2026
भगवान श्रीकृष्ण के छठी उत्सव और अन्नप्राशन पर पर्यावरण भारती ने किया पौधारोपण

लखीसराय : जिले के चानन प्रखंड अंतर्गत कियूल स्थित वृन्दावन में भगवान श्रीकृष्ण के षष्ठी (छठी) उत्सव एवं शिशु वेदान्त शंकर के अन्नप्राशन संस्कार के पावन अवसर पर पर्यावरण भारती द्वारा पौधारोपण किया गया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सुपारी का पौधा लगाया गया, जिसका नेतृत्व शिशु की दादी सरिता शंकर ने किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरण भारती के संस्थापक राम बिलास शाण्डिल्य ने भारतीय सनातन परंपरा के 16 संस्कारों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में लोग अपने मूल संस्कारों को भूलते जा रहे हैं, जबकि ये संस्कार जीवन को अनुशासित और प्रकृति से जोड़ने का माध्यम हैं। श्री शाण्डिल्य ने बताया कि जन्माष्टमी के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण का षष्ठी उत्सव परंपरागत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर लड्डू गोपाल के साथ षष्ठी देवी (छठी माता) की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि छठी माता के आशीर्वाद से नवजात की रक्षा होती है तथा उसे दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान प्राप्त होता है। इस दिन लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर माखन-मिश्री, दूध, दही और कढ़ी-भात का पारंपरिक भोग अर्पित किया जाता है।

अन्नप्राशन संस्कार के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इस संस्कार में शिशु को पहली बार चांदी के चम्मच से अन्न ग्रहण कराया जाता है, जो धरती माता द्वारा प्रदत्त अन्न और जल के उपभोग के अभ्यास की एक वैदिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मांगलिक और पुनीत अवसर पर पौधारोपण करना प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे उत्तम तरीका है। इस पौधारोपण कार्यक्रम में मुख्य रूप से सरिता शंकर, समीक्षा कुमारी, वीणा देवी, ज्ञान शंकर, गौतम कुमार, सुनील कुमार, शारदा शंकर, राम बिलास शाण्डिल्य, हिमालय, रणजीत और अभिजीत कश्यप सहित कई स्थानीय लोग उपस्थित रहे।