मुजफ्फरपुर में कुतबी ब्रदर्स ने बांधा समां, 'मन कुंतो मौला' पर झूमे श्रोता
- Post By Admin on Sep 06 2026
मुजफ्फरपुर : उत्तर बिहार की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले मुजफ्फरपुर शहर में एक यादगार और रूहानी शाम उस समय जीवंत हो उठी, जब विश्व प्रसिद्ध कव्वाल कुतबी ब्रदर्स ने अपने सुरों का जादू बिखेरा। शहर के मझौलिया रोड स्थित होटल एमेरल्ड के सभागार में आयोजित इस गरिमामयी सूफियाना संगीत संध्या में श्रोता देर रात तक भक्ति, आध्यात्मिकता और शास्त्रीय बंदिशों के अनूठे संगम में गोते लगाते रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक सूफी अंदाज में हुआ। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, कुतबी ब्रदर्स की मखमली और बुलंद आवाज ने पूरे वातावरण को दिव्य ऊर्जा से सराबोर कर दिया। कलाकारों ने सूफी परंपरा की समृद्ध विरासत को मंच पर साकार करते हुए महान सूफी संत हजरत अमीर खुसरो, पंजाबी सूफी संत बाबा बुल्ले शाह तथा संत कबीर की अमर वाणियों व कलामों को अपनी विशिष्ट गायकी में पिरोकर पेश किया। हारमोनियम की मधुर धुनों, तबले की सधी हुई थाप और बुलंद कोरस के साथ जब उन्होंने संतों की रचनाओं के दार्शनिक भावों को स्वर दिया, तो सभागार में उपस्थित हर शख्स मंत्रमुग्ध नजर आया।
महफिल का चरम उस वक्त देखने को मिला जब कुतबी ब्रदर्स ने हजरत अमीर खुसरो का सुप्रसिद्ध सूफी तराना और कलाम “मन कुंतो मौला” का सस्वर पाठ शुरू किया। इस प्रस्तुति पर श्रोता भाव-विभोर होकर झूम उठे और पूरा परिसर देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। इसके साथ ही कलाकारों ने पारंपरिक आस्ताना गायकी और सूफियाना कलामों की दुर्लभ बंदिशों को जिस नफासत और रूहानियत के साथ प्रस्तुत किया, उसने संगीत के पारखियों को गहराई से प्रभावित किया। गायकी के बीच-बीच में सूफी संतों के जीवन दर्शन, प्रेम, सद्भाव और आपसी भाईचारे के संदेशों की व्याख्या ने प्रस्तुति को और अधिक अर्थपूर्ण बना दिया।
इस भव्य सांस्कृतिक एवं संगीत संध्या की रूपरेखा सेंट स्टीफेंस कॉलेज दिल्ली के डीन सह प्राध्यापक, बीबीसी के पूर्व खेल संपादक डॉ. मलय नीरव एवं तुलिका द्वारा तैयार की गई थी, जिनके सुरुचिपूर्ण संयोजन ने इस आयोजन को मुजफ्फरपुर के इतिहास में एक मील का पत्थर बना दिया। अपने उद्बोधन में डॉ. मलय नीरव ने कहा कि मुजफ्फरपुर गौतम बुद्ध के संस्कार, साहित्य, संस्कृति एवं कला के समृद्ध परंपरा की धरती रही है। आज विश्व प्रसिद्ध कव्वाली गायक कुतबी ब्रदर्स की गायिकी यहाँ के कला के रंग में घुलेगा और आप इस ऐतिहासिक दिन के गवाह रहेंगे। इस अवसर पर शहर के नामचीन साहित्यकार, कवि, शिक्षाविद, प्रबुद्ध नागरिक, वरिष्ठ समाजसेवी और बड़ी संख्या में कला-संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस प्रकार के उच्चस्तरीय सांस्कृतिक आयोजनों को शहर की बौद्धिक और सांस्कृतिक चेतना के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
कार्यक्रम में अमिताभ राजन, कविता राजन, साहित्य अकदमी सम्मान से सम्मानित प्रसिद्ध कवयित्री अनामिका, बिंदू अमिताभ, नैयर हसनैन खान, डॉ राजीव कुमार, डॉ प्रमोद कुमार, डॉ ममता रानी, डॉ संजय पंकज, डॉ ज्योति नारायण, डॉ अरुण साह, डॉ पंकज कर्ण, डॉ रमेश रितम्भर, डॉ सतीश कुमार, डॉ बबीता कुमारी, डॉ तृप्ति सिंह, अरविंद वरुण समेत शहर के अनेक साहित्यकार, कवि, समाजसेवी तथा बुद्धिजीवी वर्ग के लोग उपस्थित रहे।
सूफियाना संगीत की यह महफिल न केवल कला और आध्यात्मिकता के अनूठे मेल की गवाह बनी, बल्कि इसने मुजफ्फरपुर के सांस्कृतिक परिदृश्य पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ते हुए उपस्थित श्रोताओं को आत्मिक शांति और अविस्मरणीय आनंद की अनुभूति कराई।