मुजफ्फरपुर में विद्या भारती की शिक्षा नीति पर मंथन, भारतीय संस्कृति और कौशल शिक्षा पर जोर
- Post By Admin on Sep 04 2026
मुजफ्फरपुर : विद्या भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र कान्हेरे ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कार, भारतीय संस्कृति, जीवन-मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती की गतिविधियों में भारतीयता और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को प्रमुख स्थान दिया जाता है। वे शुक्रवार को लोक शिक्षा समिति, बिहार की उत्तर बिहार इकाई की ओर से भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. कान्हेरे ने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना विद्या भारती की प्राथमिकताओं में शामिल है। ग्रामीण, वनवासी और दूर-दराज के सीमावर्ती इलाकों में संचालित एकल विद्यालयों और संस्कार केंद्रों के माध्यम से शिक्षा के साथ सामाजिक चेतना, संस्कार और समरसता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन के कार्यकर्ता लगातार विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास कर शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने और समाज के साथ आत्मीय संपर्क बढ़ाने में जुटे हैं।
उन्होंने बताया कि वन्दे मातरम् गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 25 सितंबर को देशभर में विशेष आयोजन किया जाएगा। इस दिन पूर्वाह्न 11 बजे विद्या भारती के विद्यालयों के साथ बड़ी संख्या में अन्य शिक्षण संस्थानों में भी एक साथ सामूहिक रूप से वन्दे मातरम् का गायन किया जाएगा। डॉ. कान्हेरे ने इसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसर बताते हुए कहा कि आयोजन में कम से कम एक करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम लोगों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की।
पंचपदी और पंचकोश पद्धति से सर्वांगीण विकास पर जोर
डिजिटल दौर में नई पीढ़ी की बदलती जरूरतों का उल्लेख करते हुए डॉ. कान्हेरे ने कहा कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जोड़े रखना आज पहले से अधिक जरूरी है। विद्या भारती की पंचपदी शिक्षण प्रणाली में अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग और प्रसार के जरिए ज्ञान को व्यवहार से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। इसके साथ ही पंचकोश आधारित शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास पर जोर दिया जा रहा है।
शिक्षक प्रशिक्षण को लेकर उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में भारतीय जीवन-मूल्यों को केंद्र में रखने की आवश्यकता है। विद्या भारती चार वर्षीय एकीकृत कला स्नातक-शिक्षा स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। इसके अलावा विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में शिक्षकों के निरंतर क्षमता संवर्धन और बौद्धिक विकास के लिए भी कार्ययोजना तैयार की गई है।
शिक्षक-विद्यार्थी संवाद को बताया अहम
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि विद्या भारती की शिक्षण व्यवस्था में आत्मीय संवाद को विशेष महत्व दिया जाता है। शिक्षक केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यार्थियों और उनके परिवारों के साथ भी निरंतर संपर्क बनाए रखते हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं के साथ उनकी भावनात्मक और व्यवहारिक चुनौतियों को समझने तथा उनके समाधान की दिशा में काम करने में मदद मिलती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में डॉ. कान्हेरे ने कहा कि विद्या भारती ने कला और कौशल आधारित शिक्षा को अपनी शिक्षण योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। संगीत, ललित कला, हस्तशिल्प के साथ व्यावहारिक और व्यावसायिक कौशल के जरिए विद्यार्थियों में रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं माना जाना चाहिए। इसका व्यापक उद्देश्य चरित्रवान, संस्कारित, आत्मनिर्भर और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़कर ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने का प्रयास है, जो विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखते हुए भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाए।
पत्रकार वार्ता में लोक शिक्षा समिति, बिहार के अध्यक्ष रामप्रकाश प्रसाद, उपाध्यक्ष विजय कुमार झा, डॉ. ललित किशोर, डॉ. सत्यनारायण प्रसाद, प्रोफेसर अंकज कुमार सिंह और भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल मौजूद रहे। संचालन विद्या भारती बिहार के मीडिया समन्वयक नवीन सिंह परमार ने किया।