प्लांट-बेस्ड मिल्क पर बड़ा शोध, बीआरएबीयू कुलपति के नेतृत्व में अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय मान्यता

  • Post By Admin on Apr 01 2026
प्लांट-बेस्ड मिल्क पर बड़ा शोध, बीआरएबीयू कुलपति के नेतृत्व में अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय मान्यता

मुजफ्फरपुर/वाराणसी : प्रख्यात खाद्य वैज्ञानिक और बीआर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय शोध दल ने प्लांट-बेस्ड मिल्क पर महत्वपूर्ण अध्ययन कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल की है। यह शोध प्रतिष्ठित एल्सेवियर जर्नल “फूड न्यूट्रिशन” में प्रकाशित हुआ है, जिसमें पौधों से प्राप्त दूध के विकल्पों के प्रसंस्करण, पोषण प्रोफाइल और उनके स्वास्थ्य प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

यह शोध भारत के बदलते आहार परिदृश्य में प्लांट-बेस्ड मिल्क को एक टिकाऊ और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता है। अध्ययन में ओट्स, बादाम, सोया और नारियल से प्राप्त दूध के विकल्पों का पारंपरिक गाय के दूध के साथ तुलनात्मक मूल्यांकन किया गया है। शोध में पाया गया कि इन विकल्पों में प्रोटीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है, लेकिन इनमें फाइबर, फाइटोस्टेरॉल, आइसोफ्लेवोन्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे महत्वपूर्ण बायोएक्टिव तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य और एंटीऑक्सीडेंट लाभ प्रदान करते हैं।

कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने बताया कि उन्नत तकनीकों जैसे एंजाइमेटिक हाइड्रोलिसिस और रणनीतिक सुदृढ़ीकरण के माध्यम से खाद्य निर्माता भारत की बड़ी लैक्टोज असहिष्णु आबादी के लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट उत्पाद विकसित कर सकते हैं।

यह अध्ययन देश के विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों के सहयोग से पूरा हुआ। शोध दल में राजीव गांधी विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश के अशोक कुमार यादव और नानम रोन्जा, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के अमन राठौर और हिमांशु त्रिवेदी तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी विभाग से विकास पटेल शामिल रहे।

प्रो. राय ने कहा कि यह शोध डेयरी क्षेत्र के विविधीकरण के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को भी उजागर करता है। बिहार जैसे राज्यों में बाजरा और मक्का जैसी स्थानीय फसलों का उपयोग कर ग्रामीण उद्यमिता और कृषि मूल्यवर्धन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दो वर्षों में प्रो. दिनेश चंद्र राय का यह विश्व की अग्रणी पत्रिकाओं में प्रकाशित 30वां अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र है। उनकी इस उपलब्धि पर अकादमिक जगत और पूर्व छात्र संगठनों ने हर्ष व्यक्त किया है।