पंचकोश, पंचपदी और शैक्षिक नेतृत्व पर विशेषज्ञों के व्याख्यान, आचार्यों ने लिया समग्र शिक्षा का संकल्प
- Post By Admin on Jul 11 2026
मुजफ्फरपुर : विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं विद्या भारती बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग के तीसरे दिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचकोश, पंचपदी सिद्धांत और शैक्षिक नेतृत्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। दिनभर चले चार शैक्षणिक सत्रों में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने समग्र शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और शिक्षकों की नेतृत्व क्षमता को मजबूत बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सदातपुर में मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि, दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। विभाग निरीक्षक राजेश कुमार रंजन ने मुख्य वक्ताओं का अंगवस्त्र देकर स्वागत किया, जबकि प्रशिक्षण वर्ग का संचालन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राकेश कुमार पाल ने किया।
प्रथम सत्र में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के क्षेत्रीय संयोजक प्रो. रमन कुमार त्रिवेदी ने "राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : समग्र एवं बहुविषयक शिक्षा" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि संस्कारित, आत्मनिर्भर और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करना है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, आधुनिक विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के समन्वय को शिक्षा नीति की प्रमुख विशेषता बताते हुए शिक्षकों से सतत अध्ययन, शोध और नवाचार अपनाने का आह्वान किया।
द्वितीय एवं तृतीय सत्र में विद्या भारती के वरिष्ठ शिक्षाविद श्री उमा शंकर पोद्दार ने तैत्तिरीय उपनिषद में वर्णित पंचकोश और पंचपदी शिक्षण पद्धति की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग और प्रसार पर आधारित पंचपदी पद्धति को जीवनोपयोगी एवं अनुभवात्मक शिक्षा का प्रभावी माध्यम बताया।
चौथे सत्र में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए), नई दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शंकर परिपल्ली ने "शैक्षिक नेतृत्व एवं शिक्षकों का व्यावसायिक विकास" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि आज के दौर में शिक्षक को केवल अध्यापन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे प्रभावी शैक्षिक नेता, नवाचारी चिंतक और आजीवन सीखने वाला मार्गदर्शक बनना होगा। उन्होंने डिजिटल दक्षता, अनुसंधान, नवाचार और सहयोगात्मक नेतृत्व को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आधारशिला बताया।
कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय शिक्षा दर्शन, समग्र शिक्षा, पंचकोश, पंचपदी तथा शिक्षकों के व्यावसायिक विकास पर व्यापक मंथन हुआ। प्रतिभागी आचार्यों ने अपने-अपने शिक्षण संस्थानों में इन अवधारणाओं को व्यवहार में लागू कर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। प्रशिक्षण वर्ग में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष रजनीश कुमार गुप्ता, सहसचिव डॉ. ललित किशोर, विभाग निरीक्षक राजेश कुमार रंजन सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा समूह चर्चा और "वंदे मातरम्" के सामूहिक गायन के साथ तीसरे दिन के सत्रों का समापन हुआ।