सरला श्रीवास जयंती पखवाड़े में कठपुतली कला और AI के संगम पर जोर
- Post By Admin on Aug 28 2026
गाजियाबाद: पत्रकार परिसर, वसुंधरा में सीजी नेट स्वर एवं सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन की ओर से कठपुतली कलाकार एवं शांति दूत सरला श्रीवास जयंती पखवाड़े का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता शुभ्राशु चौधरी ने की।
शुभ्राशु चौधरी ने कहा कि सरला श्रीवास ने कठपुतली कला को केवल मंचीय प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे प्रेम, शांति, भाईचारे और मानवीय मूल्यों के प्रसार का प्रभावी माध्यम बनाया। उनके लिए कला महज अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का सशक्त साधन थी। उनके व्यक्तित्व में सादगी, संवेदनशीलता, सेवा भावना और लोकसंस्कृति के प्रति गहरा समर्पण दिखाई देता था। उन्होंने बताया कि सरला श्रीवास ने लोककला के माध्यम से शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकार, स्वास्थ्य और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरूकता का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुतियां मनोरंजन के साथ दर्शकों को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सोचने के लिए भी प्रेरित करती थीं।
कार्यक्रम में पारंपरिक कठपुतली कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल कंटेंट, कहानी लेखन, आवाज, संगीत और दृश्य प्रभाव जैसी तकनीकों को कठपुतली प्रदर्शन के साथ जोड़कर कला के नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इस पहल के माध्यम से शैक्षणिक वीडियो, लोककथाएं, जनजागरूकता संदेश, सामाजिक विषयों पर लघु नाटक, डिजिटल कठपुतली शो और बच्चों के लिए मनोरंजक शिक्षण सामग्री तैयार करने की संभावनाओं पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य पारंपरिक कठपुतली कलाकारों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, युवाओं को लोककला की ओर आकर्षित करना तथा कलाकारों के लिए डिजिटल मंच और रोजगार के नए अवसर विकसित करना है। सरला श्रीवास सोशल कल्चरल रिसर्च फाउंडेशन के सचिव, लोक कलाकार एवं कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने कहा कि शांति दूत सरला श्रीवास की विचारधारा आज भी कलाकारों, युवाओं और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं को लोक परंपराओं के संरक्षण तथा मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि कठपुतली कला और AI की तकनीकी क्षमता को एक साथ लाकर शिक्षा, मनोरंजन और जनजागरूकता के लिए प्रभावी डिजिटल सामग्री तैयार की जा रही है।
उन्होंने बताया कि भविष्य में AI एवं कठपुतली कला पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करने, बच्चों एवं युवाओं के लिए रचनात्मक कार्यक्रम शुरू करने, डिजिटल कठपुतली निर्माण, AI आधारित कहानी एवं संवाद लेखन तथा लोककला आधारित डिजिटल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने की योजना है। सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने कहा कि सरला श्रीवास का जीवन यह संदेश देता है कि कला तभी सार्थक है, जब वह समाज को बेहतर बनाने में योगदान दे। उन्होंने कहा कि सरला श्रीवास कठपुतली कला के माध्यम से समाज को जोड़ने, जागरूक करने, हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने और शांति का संदेश देने वाली सशक्त कलाकार थीं। जयंती पखवाड़े के अवसर पर उपस्थित लोगों ने कठपुतली कला, लोककला, लोक संस्कृति और मानवता से जुड़ी इस विरासत को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।