सावन के तीसरे सोमवार पर ऐसे करें जलाभिषेक, मिलेगी महादेव की विशेष कृपा

  • Post By Admin on Aug 14 2026
सावन के तीसरे सोमवार पर ऐसे करें जलाभिषेक, मिलेगी महादेव की विशेष कृपा

धर्म डेस्क : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह वर्ष का पांचवां महीना है और इस दौरान किए गए व्रत, पूजा-पाठ और जलाभिषेक को विशेष फलदायी बताया गया है। श्रद्धालुओं के बीच सावन के सोमवारों का महत्व सबसे अधिक माना जाता है, वहीं तीसरा सोमवार भगवान शिव के नीलकंठ और अर्धनारीश्वर स्वरूप की पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार सावन मास में ही देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था। इस मंथन से निकले भयंकर हलाहल विष से पूरी सृष्टि संकट में पड़ गई थी। तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। मान्यता है कि विष की तीव्र जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने शिवलिंग पर शीतल जल और गंगाजल अर्पित किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा प्रचलित हुई।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार सावन के तीसरे सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त या शुभ चौघड़िया में स्नान करके पूजा आरंभ करनी चाहिए। तांबे के लोटे में शुद्ध जल और गंगाजल भरकर अपना नाम और गोत्र बोलते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और शिवलिंग पर धीमी धारा से जल अर्पित करें। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प और अन्य पूजन सामग्री चढ़ानी चाहिए।

पूजा के दौरान पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल चढ़ाना शुभ माना गया है। चौघड़िया का अर्थ ‘चार घटी’ अर्थात शुभ समय से होता है, जिसमें भगवान शिव को जल अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। तीसरे सोमवार के अभिषेक में तांबे का लोटा जल के लिए तथा पीतल या मिट्टी का पात्र दूध के लिए उपयोग करना उत्तम माना गया है। अभिषेक में शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का प्रयोग किया जा सकता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विभिन्न मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष प्रकार का अभिषेक भी किया जाता है। आर्थिक तंगी दूर करने के लिए जल में थोड़ा गन्ने का रस या शहद मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाने की सलाह दी जाती है। मानसिक शांति और तनाव मुक्ति के लिए जल में थोड़ा कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर अभिषेक करना शुभ माना जाता है। वहीं रोगों से मुक्ति की कामना करने वाले श्रद्धालु जल में कुशा या दूर्वा डालकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सावन के तीसरे सोमवार को श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया जलाभिषेक भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।