संघर्ष और संस्कृति के प्रतीक यादवचन्द्र को नमन, 19वीं स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित

  • Post By Admin on Feb 23 2026
संघर्ष और संस्कृति के प्रतीक यादवचन्द्र को नमन, 19वीं स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित

मुजफ्फरपुर : चुन्नाभट्टी रोड स्थित यादवचन्द्र–शांति देवी ट्रस्ट सभागार में महान रंगकर्मी, साहित्यिक यात्री, सफल संगठनकर्ता एवं शोषित-पीड़ितों की मुखर आवाज कामरेड यादवचन्द्र की 19वीं स्मृति दिवस श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा 'विकल्प' एवं नवोदित इकाई के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम तीन सत्रों—विचार गोष्ठी, काव्य गोष्ठी और सांस्कृतिक संध्या—में आयोजित हुआ। शुरुआत ‘विकल्प’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रवीन्द्र कुमार ‘रवि’ तथा मालीघाट इकाई के अध्यक्ष अरुण कुमार वर्मा द्वारा यादवचन्द्र के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।

विचार गोष्ठी में व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा

प्रथम सत्र का उद्घाटन करते हुए डॉ. रवीन्द्र कुमार ‘रवि’ ने कहा कि यादवचन्द्र का व्यक्तित्व और कृतित्व एक मशाल की तरह है, जो अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष की प्रेरणा देता है। उन्होंने उनकी रचनाओं—‘परम्परा और विद्रोह’, ‘एक किस्त पराजय’ और ‘खौल रही फल्गु’—को सामाजिक बदलाव का आईना बताया।

हिंदी प्राध्यापक मनोज कुमार ने कहा कि यादवचन्द्र का जीवन पूरी तरह समाज को समर्पित था और उनके जीने व रचने में कोई अंतर नहीं था। वरिष्ठ रंगकर्मी कामेश्वर प्रसाद ‘दिनेश’ ने कहा कि यादवचन्द्र केवल साहित्यकार ही नहीं, बल्कि सशक्त रंगकर्मी भी थे। उन्होंने प्रेमचंद की कहानियों ‘कफन’, ‘सवा सेर गेहूं’ और ‘पूस की रात’ का सफल नाट्य रूपांतरण कर रंगमंच को नई ऊंचाई दी।

युवा रंगकर्मी धीरेन्द्र धीरु ने उन्हें कुशल शिक्षक बताते हुए कहा कि उनकी सरल शिक्षण शैली आज भी प्रेरणा देती है। अरुण कुमार वर्मा ने अध्यक्षीय संबोधन में यादवचन्द्र को स्वतंत्रता संग्राम के बाल क्रांतिकारी और जनकवि नागार्जुन के सहचर के रूप में याद किया। नंद किशोर नंदन द्वारा लिखित आलेख का वाचन भी किया गया। गोष्ठी में नीरज प्रकाश, अली अहमद मंजर, प्रमोद आजाद, दिवाकर घोष, अवधेश कुमार और बाबू लाल सहनी सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

काव्य गोष्ठी में रचनाओं की प्रस्तुति

द्वितीय सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि कुमार विरल ने की। इस दौरान नीरज, विभाकर विमल, उमेश राज, महफूज अहमद आरिफ, अंजनी कुमार पाठक, अंशु कुमार, मो. एहसान, अभय कुमार शब्द, पूजा कुमारी, अमन और अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।

सांस्कृतिक संध्या में जनगीत और नाटक की प्रस्तुति

तीसरे सत्र में जागृति बैरिया, सरला श्रीवास सांस्कृतिक सामाजिक संगठन के संस्थापक सुनील कुमार तथा नवोदित इकाई की टीम ने जनगीत प्रस्तुत किए, जिन्हें दर्शकों ने उत्साहपूर्वक सराहा। ‘विकल्प’ साहेबगंज इकाई की टीम ने नाटक ‘सबसे सस्ता गोश्त’ की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, रंगकर्मी और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में मालीघाट इकाई की सचिव पूजा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह ने यादवचन्द्र की वैचारिक विरासत और सांस्कृतिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।