बाढ़, सूखा और लू पर जिम्मेदार रिपोर्टिंग से ही बढ़ेगी जनजागरूकता : डॉ. नीलसन
- Post By Admin on Jun 13 2026
पटना : जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न आपदाओं के दौरान बच्चों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों की संवेदनशील एवं जिम्मेदार रिपोर्टिंग की आवश्यकता पर जोर देते हुए यूनिसेफ बिहार की फील्ड ऑफिस प्रमुख डॉ. मोनिका नीलसन ने कहा कि जलवायु संकट की सबसे बड़ी मार समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर बच्चों और महिलाओं पर पड़ती है। ऐसे में मीडिया की भूमिका केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने लाने का माध्यम भी है।
मीडिया और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक कार्यशाला में डॉ. नीलसन ने कहा कि जलवायु संकट की कहानी के केंद्र में वे बच्चे और महिलाएं हैं, जो अक्सर मुख्यधारा की रिपोर्टिंग से छूट जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि स्कूल छोड़ने के खतरे से जूझ रही किशोरियां, स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर रहने वाली गर्भवती महिलाएं तथा टीकाकरण से वंचित छोटे बच्चे आपदाओं से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इसलिए इन मानवीय पहलुओं को समझना और उन्हें रिपोर्टिंग में उचित स्थान देना आवश्यक है।कार्यशाला में बाढ़, सूखा, लू और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अन्य आपदाओं पर किए गए अध्ययनों की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि इन आपदाओं का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों और महिलाओं पर पड़ता है। वक्ताओं ने कहा कि मीडिया की जिम्मेदार रिपोर्टिंग न केवल लोगों को जागरूक करती है, बल्कि कमजोर वर्गों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस अवसर पर बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव मोहम्मद नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने कहा कि राज्य सरकार बाढ़, लू और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अन्य आपदाओं सहित हर प्रकार की आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि पूर्व चेतावनी प्रणाली, आपदा पूर्व तैयारी तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत किया गया है। प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। श्री सिद्दीकी ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समुदाय और मीडिया की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि आपदा के दौरान केवल सत्यापित और तथ्यपरक सूचनाओं का ही प्रसार करें, ताकि अफवाहों और भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए यूनिसेफ के वॉश (WASH) विशेषज्ञ सुधाकर रेड्डी ने जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़ और सूखे जैसी घटनाओं का प्रभाव बच्चों, महिलाओं और वंचित समुदायों पर असमान रूप से अधिक पड़ता है। इन परिस्थितियों में पेयजल स्रोत दूषित हो जाते हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन को केवल पर्यावरणीय चुनौती के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों, स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा है, जिस पर समाज और मीडिया दोनों को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।