एलएनटी महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की तैयारियां पूरी, 106 प्रतिभागियों ने कराया पंजीकरण

  • Post By Admin on Jul 09 2026
एलएनटी महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की तैयारियां पूरी, 106 प्रतिभागियों ने कराया पंजीकरण

मुजफ्फरपुर: एलएनटी महाविद्यालय में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान आयोजन समिति ने सेमिनार की रूपरेखा, उद्देश्य और तैयारियों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 106 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जबकि प्रतिभागियों की संख्या 150 तक पहुंचने की संभावना है।

आयोजन समिति के अनुसार यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एलएनटी महाविद्यालय के साथ एस.के. सिन्हा वीमेंस कॉलेज, मोतिहारी, एमएसकेबी कॉलेज, मुजफ्फरपुर तथा राय ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मरकन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सेमिनार का विषय "Myth, Society and Cultural Narrative in Indian English Literature" रखा गया है। आयोजकों ने बताया कि यह विषय नई शिक्षा नीति (एनईपी) के उद्देश्यों के अनुरूप है और विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा शिक्षकों के लिए शोध एवं अकादमिक विमर्श का महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराएगा।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि सेमिनार में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा सऊदी अरब, नेपाल सहित अन्य देशों के विद्वान, शोधार्थी और शिक्षाविद भी भाग लेंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दिनेश चंद्र राय करेंगे। इस अवसर पर सेमिनार की स्मारिका का भी लोकार्पण किया जाएगा। आयोजन समिति ने बताया कि सेमिनार के दौरान कुल नौ समानांतर तकनीकी (पैरेलल) सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें प्रतिभागी अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। समिति ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक प्रतिभागी के लिए शोधपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा तथा बिना शोधपत्र प्रस्तुति के पेपर प्रेजेंटेशन का प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाएगा। प्रेस वार्ता में एमएसकेबी कॉलेज की डॉ. ललित प्रभा, राय ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की डॉ. मोनालिसा, बिहार विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के प्रो. मोहम्मद इकबाल हुसैन, सेमिनार के कन्वेनर डॉ. जितेंद्र कुमार मिश्रा, ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी संतोष कुमार सहित आयोजन समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

आयोजन समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अंतरराष्ट्रीय सेमिनार भारतीय अंग्रेजी साहित्य, मिथक, समाज और सांस्कृतिक विमर्श के क्षेत्र में नए शोध और विचारों को प्रोत्साहित करेगा तथा उच्च शिक्षा और अकादमिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।