शिक्षा, संस्कार और शोध के समन्वय पर जोर, मुजफ्फरपुर में क्षेत्रीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का आगाज

  • Post By Admin on Jul 09 2026
शिक्षा, संस्कार और शोध के समन्वय पर जोर, मुजफ्फरपुर में क्षेत्रीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का आगाज

मुजफ्फरपुर : भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्यपरक शिक्षा, चरित्र निर्माण और आधुनिक शिक्षण पद्धति के समन्वय को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं विद्या भारती बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय क्षेत्रीय आचार्य स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग का गुरुवार को सदातपुर स्थित भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण वर्ग 9 से 15 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा।

प्रशिक्षण वर्ग में आदित्य प्रकाश जालान टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, रांची, पूरनमल बाजोरिया टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, भागलपुर तथा भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर के आचार्य एवं संकाय सदस्य भाग ले रहे हैं। उद्घाटन सत्र की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत वातावरण के बीच हुई। कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथियों का परिचय विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के सह सचिव डॉ. ललित किशोर ने कराया। उन्होंने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।प्रशिक्षण वर्ग की विषय-प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष प्रो. रजनीश कुमार गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुसंधान, नवाचार और मूल्यनिष्ठ शिक्षा के संवाहक के रूप में समाज का मार्गदर्शन करना होगा। उन्होंने आचार्यों से शोध आधारित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय ने कहा कि "शिक्षक केवल विषय का ज्ञाता नहीं, बल्कि राष्ट्र का विधाता है।" उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता पर बल देते हुए विश्वविद्यालय में चल रहे विभिन्न शैक्षणिक नवाचारों की जानकारी भी साझा की। विशिष्ट अतिथि विद्या भारती अखिल भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान के उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व का विकास करना है। उन्होंने भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उत्तर-पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय संयोजक प्रो. रमण त्रिवेदी ने कहा कि भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से राष्ट्र निर्माण, भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और मूल्याधारित शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।

उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने "सा विद्या या विमुक्तये" को शिक्षा का मूल मंत्र बताते हुए तक्षशिला और नालंदा जैसी गौरवशाली शैक्षणिक परंपराओं का उल्लेख किया। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीयता, पंचकोशीय शिक्षा, चरित्र निर्माण और विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर विशेष चर्चा की गई। कार्यक्रम के अंत में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के सचिव डॉ. अमर बहादुर शुक्ल ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगीत "वंदे मातरम्" के सामूहिक गायन के साथ उद्घाटन सत्र का समापन हुआ। प्रशिक्षण वर्ग के आगामी सत्रों में शिक्षा, अनुसंधान, भारतीय ज्ञान परंपरा, नवाचार, शिक्षण तकनीक और व्यक्तित्व विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान एवं प्रशिक्षण दिया जाएगा।