जन औषधि दिवस पर जमुई में देव वृक्ष बरगद का पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

  • Post By Admin on Mar 07 2026
जन औषधि दिवस पर जमुई में देव वृक्ष बरगद का पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

जमुई: जन औषधि दिवस के अवसर पर पर्यावरण भारती की ओर से जमुई में देव वृक्ष बरगद का पौधारोपण किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व पर्यावरण भारती के जमुई नगर संयोजक वैद्य दीपक कुमार मोदी ने किया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा औषधीय एवं पर्यावरणीय महत्व वाले वृक्षों के रोपण को बढ़ावा देना था।

पर्यावरण भारती के संस्थापक, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक एवं अखिल भारतीय पेड़ उपक्रम टोली के सदस्य राम बिलास शाण्डिल्य ने इस अवसर पर कहा कि वट वृक्ष यानी बरगद की आयु संसार में सबसे अधिक मानी जाती है। उन्होंने बताया कि महाभारत काल का अक्षय वट वृक्ष कुरुक्षेत्र में लगभग 5000 वर्षों से अधिक समय से मौजूद है। वहीं पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित इंडियन बोटनिकल गार्डन में 255 वर्ष से अधिक आयु का विशाल “ग्रेट बैनियन ट्री” लगभग पांच एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसकी करीब 2800 जड़ें हैं और इसकी देखभाल के लिए 13 वनकर्मी तैनात हैं। उन्होंने कहा कि बरगद को वृक्षों का राजा माना जाता है और यह मानव जीवन तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बरगद का वृक्ष औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है। इसके दूध का सेवन कैल्शियम की कमी को दूर करने में सहायक माना जाता है, वहीं इसमें एंटीबायोटिक गुण होने के कारण घाव, जोड़ों के दर्द और त्वचा संबंधी समस्याओं में भी लाभ मिलता है। बरगद की टहनियों से दातुन करने से दांतों और मसूड़ों की समस्याओं में राहत मिलती है, जबकि इसकी छाल के काढ़े का उपयोग दस्त जैसी समस्याओं में किया जाता है।

उन्होंने कहा कि बरगद का वृक्ष अत्यधिक मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करता है और इसकी छाया में बैठने से मन को शांति मिलती है। भारत में प्राचीन काल से ही बरगद को देव वृक्ष के रूप में पूजा जाता रहा है। ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को महिलाएं वट सावित्री व्रत बरगद के पेड़ के नीचे संपन्न करती हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक बरगद का पौधा अवश्य लगाए और उसकी सुरक्षा का संकल्प ले। कार्यक्रम के दौरान पत्रकार एवं अवकाशप्राप्त प्रोफेसर राम जीवन साहू ने बताया कि भारत में पहली बार 7 मार्च 2019 को जन औषधि दिवस मनाया गया था। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनरिक दवाओं के उपयोग के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने बताया कि ब्रांडेड दवाओं की तुलना में जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाएं 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना की शुरुआत नवंबर 2008 में हुई थी और वर्तमान में देश में 18 हजार से अधिक जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं। वर्ष 2027 तक इनकी संख्या बढ़ाकर 25 हजार करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस अवसर पर पर्यावरण भारती द्वारा बरगद का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में प्रोफेसर राम जीवन साहू, वैद्य दीपक कुमार मोदी, अंकित पंडित, इंजीनियर नवीन कुमार साह, श्रीमती मधु भालोटिया, सरिता कुमारी साह, इंजीनियर कशीश कुमारी केशरी, सविता कुमारी, किरण कुमारी, कृष्णा कुमारी, शुभम, सत्यम सहित कई लोग उपस्थित रहे।