जनसंख्या नियंत्रण और बेहतर स्वास्थ्य के लिए परिवार नियोजन जरूरी : एसीएमओ

  • Post By Admin on Jun 16 2026
जनसंख्या नियंत्रण और बेहतर स्वास्थ्य के लिए परिवार नियोजन जरूरी : एसीएमओ

लखीसराय : परिवार और समाज के समग्र विकास के लिए परिवार नियोजन को अपनाना आवश्यक है। परिवार छोटा होने पर शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रगति के अवसर बेहतर होते हैं। परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

जिला अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार भारती ने कहा कि परिवार नियोजन के दो प्रमुख साधन हैं—स्थायी एवं अस्थायी। लोगों को समय और आवश्यकता के अनुसार इन विकल्पों की सही जानकारी होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि जिले के कई दूरदराज क्षेत्रों में आज भी लोग इन दोनों साधनों के बीच का अंतर पूरी तरह नहीं समझ पाते हैं, जिसके कारण अनचाहे गर्भधारण और जनसंख्या वृद्धि जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। डॉ. भारती ने कहा कि परिवार नियोजन संबंधी जागरूकता की कमी से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर बढ़ने का खतरा भी बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आशा कार्यकर्ता नियमित गृह भ्रमण के दौरान सतघरवा, जानकीडीह, महजनवा सहित अन्य सुदूरवर्ती गांवों में लोगों को परिवार नियोजन के विभिन्न विकल्पों की जानकारी दे रही हैं। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि किन परिस्थितियों में कौन-सा साधन अपनाना अधिक उपयुक्त होगा। उन्होंने कहा कि नियमित टीकाकरण सत्रों के दौरान भी धात्री महिलाओं को परिवार नियोजन के स्थायी और अस्थायी साधनों के बारे में विस्तार से जानकारी देकर जागरूक किया जाना चाहिए। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की टीमों को समुदाय के बीच बैठकें आयोजित कर परिवार नियोजन के महत्व पर चर्चा करनी चाहिए।

अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से समुदाय तक संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसे सामुदायिक बैठकों के आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़े और लोग अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए सही निर्णय ले सकें। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि परिवार नियोजन अपनाकर न केवल परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत की जा सकती है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाया जा सकता है।