पानापुर करियात थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष पर 24 घंटे में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश

  • Post By Admin on Jun 16 2026
पानापुर करियात थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष पर 24 घंटे में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश

लॉक-अप में युवक की पिटाई मामले में कार्रवाई, मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसएसपी को कारण बताओ नोटिस

मुजफ्फरपुर:  पानापुर करियात थाना में कथित रूप से हिरासत में लिए गए युवक के साथ मारपीट और मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने तत्कालीन थानाध्यक्ष राजबल्लभ प्रसाद के विरुद्ध 24 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है। साथ ही बिहार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरैया थाना क्षेत्र के बहिलवारा रुपनाथ निवासी अमन कुमार को 11 मार्च 2025 की सुबह करीब तीन बजे पानापुर करियात थाना पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि हिरासत की सूचना मिलने पर अमन कुमार के बहनोई रौशन प्रताप सिंह जब उनसे मिलने थाने पहुंचे तो उन्हें भी थाने में रोक लिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष ने अमन कुमार को छोड़ने के एवज में एक लाख रुपये की मांग की थी। विरोध करने पर रौशन प्रताप सिंह को भी लॉक-अप में बंद कर दिया गया तथा उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। आरोप है कि बाद में परिजनों से 70 हजार रुपये लेने के बाद दोनों को छोड़ा गया, जबकि एक मोटरसाइकिल को छोड़ने के लिए अलग से 30 हजार रुपये की मांग की गई।

मारपीट में घायल रौशन प्रताप सिंह को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कांटी ले जाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) रेफर कर दिया गया था। मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा के माध्यम से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और बिहार मानवाधिकार आयोग (बीएचआरसी) में शिकायत दर्ज कराई थी। आयोग ने मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए बिहार सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही यह भी पूछा है कि पीड़ित को एक लाख रुपये का मुआवजा क्यों नहीं दिया जाए तथा संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ अब तक प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई।

आयोग की सख्ती के बाद पानापुर करियात थाना की ओर से पीड़ित परिवार को नोटिस जारी कर आवेदन देने के लिए बुलाया गया। इसके बाद रौशन प्रताप सिंह की मां वीणा सिंह ने तत्कालीन थानाध्यक्ष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन सौंपा। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मानवाधिकार मामलों के जानकार अधिवक्ता एस.के. झा ने कहा कि यह प्रकरण प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि एक प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पीड़ित परिवार को पटना से लेकर दिल्ली तक न्याय की गुहार लगानी पड़ी। हालांकि उन्हें विश्वास है कि एनएचआरसी और बीएचआरसी दोनों स्तरों पर पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा। फिलहाल मामला राष्ट्रीय एवं राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष विचाराधीन है और आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।