मुजफ्फरपुर में ओला का अदृश्य खेल: गाड़ी बनी नहीं, पर कागजों में सड़क पर लगी दौड़ने

  • Post By Admin on May 15 2026
मुजफ्फरपुर में ओला का अदृश्य खेल: गाड़ी बनी नहीं, पर कागजों में सड़क पर लगी दौड़ने

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से ओला इलेक्ट्रिक बाइक के नाम पर धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने परिवहन विभाग के सिस्टम पर ही सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक तरफ जहां कंपनी ने अभी गाड़ी का उत्पादन (Production) तक शुरू नहीं किया है, वहीं दूसरी ओर कागजों में उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस तक हो चुका है। पीड़ित अब न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है।

क्या है पूरा मामला?

काँटी थाना क्षेत्र के छपरा गांव निवासी नवीन कुमार सिंह ने 3 अप्रैल को गोबरसही स्थित ओला एजेंसी से एक इलेक्ट्रिक बाइक बुक कराई थी। एजेंसी के दावों पर भरोसा करते हुए पीड़ित ने बाइक के लिए लोन भी मंजूर करवा लिया। लेकिन खेल तब शुरू हुआ जब महीनों बीतने के बाद भी बाइक की डिलीवरी नहीं हुई। थक-हार कर जब नवीन ने एजेंसी से संपर्क किया, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि "जिस मॉडल को आपने बुक किया है, उसका तो अभी उत्पादन ही नहीं हुआ है!"

हैरान करने वाला 'पेपर फर्जीवाड़ा'

हैरानी की बात तो यह है कि जिस बाइक का अस्तित्व ही नहीं है, उसका:

  • 7 अप्रैल को ही इंश्योरेंस कर दिया गया।
  • परिवहन विभाग द्वारा वाहन नंबर BR06EK-6991 भी अलॉट हो गया।
  • बैंक से लोन की राशि जारी हो गई और उपभोक्ता पर आर्थिक बोझ डाल दिया गया।

कानूनी शिकंजे में परिवहन विभाग और ओला

 इस गंभीर धोखाधड़ी को देखते हुए पीड़ित ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा के माध्यम से कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। अधिवक्ता ने जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) मुजफ्फरपुर, परिवहन विभाग के प्रधान सचिव और ओला एजेंसी को लीगल नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।

"यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के साथ भयंकर फर्जीवाड़ा है। बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के रजिस्ट्रेशन कैसे हो गया? यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो हम इस मामले को अदालत तक ले जाएंगे।" — एस.के. झा, मानवाधिकार अधिवक्ता

उठ रहे हैं कई बड़े सवाल

यह मामला न केवल ओला की कार्यप्रणाली बल्कि ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम और परिवहन विभाग की लापरवाही को भी उजागर करता है। सवाल यह है कि बिना गाड़ी देखे इंश्योरेंस कंपनियों और विभाग ने नंबर कैसे अलॉट कर दिए? क्या यह किसी बड़े सांठगांठ का हिस्सा है? फिलहाल, पीड़ित न्याय की आस में है और मुजफ्फरपुर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि विभाग इस पर क्या कार्रवाई करता है।