लखीसराय में आग से सैकड़ों बीघा फसल जलकर राख, किसानों पर टूटा संकट
- Post By Admin on Apr 02 2026
लखीसराय: जिले के रामगढ़ अंचल अंतर्गत शरमा गांव में लगी भीषण आग ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। खेतों में तैयार खड़ी सैकड़ों बीघा गेहूँ की फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई, जिससे दर्जनों किसान आर्थिक रूप से तबाह हो गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार आग लगने की वजह बिजली विभाग की लापरवाही बताई जा रही है। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और व्यापक क्षेत्र में फैल गई। आग की चपेट में आकर किसानों की महीनों की मेहनत और उम्मीदें राख में बदल गईं। घटना के दौरान दमकल की गाड़ियों के समय पर नहीं पहुंचने से स्थिति और गंभीर हो गई। आग पर काबू पाने में देरी के कारण नुकसान का दायरा लगातार बढ़ता गया। इसको लेकर जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आग से प्रभावित किसान अब गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उनके सामने परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी और बुजुर्गों के इलाज जैसी आवश्यक जरूरतों को पूरा करना बड़ी चुनौती बन गया है। घटना के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने इसे गंभीर प्रशासनिक विफलता बताते हुए बिजली विभाग को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी के नेताओं ने जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग की कार्यप्रणाली की भी आलोचना की है।
किसान नेता रामपदारथ सिंह, भाकपा जिला मंत्री हर्षित यादव, नेता रविविलोचन वर्मा और अधिवक्ता रजनीश कुमार ने संयुक्त रूप से सरकार से मांग की है कि इस घटना को आपदा घोषित किया जाए। साथ ही प्रत्येक प्रभावित किसान को प्रति एकड़ 50 हजार रुपये मुआवजा देने और किसानों को दोबारा खेती तथा परिवार के भरण-पोषण के लिए पांच लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके अलावा नेताओं ने बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही को लेकर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग भी उठाई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
घटना के बाद भाकपा का एक प्रतिनिधिमंडल रामगढ़ अंचल मंत्री के नेतृत्व में प्रभावित गांव पहुंचा और किसानों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जल्द राहत और मुआवजा उपलब्ध नहीं कराता है, तो किसानों के हित में व्यापक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाएगा।