महागठबंधन ने फिर खेला सुनील कुमार सिंह पर दांव, एमएलसी चुनाव के लिए नामांकन
- Post By Admin on Jun 08 2026
पटना : बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर महागठबंधन ने एक बार फिर सुनील कुमार सिंह पर भरोसा जताया है। सोमवार को उन्होंने विधान परिषद चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में सुनील कुमार सिंह ने कहा कि पार्टी ने उन्हें दूसरी बार मौका दिया है, जिसके लिए वह नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
जानकारी के अनुसार, रविवार देर शाम तक महागठबंधन की ओर से उम्मीदवार के नाम पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया था। हालांकि राजनीतिक गलियारों में लगातार यह चर्चा चल रही थी कि पार्टी एक बार फिर सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बना सकती है। सोमवार को उनके नामांकन के साथ इन अटकलों पर विराम लग गया। पिछले कुछ दिनों से राजद नेता रोहिणी आचार्य के भी उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन उन्होंने स्वयं इस विषय पर विराम लगा दिया था। इसके बाद सुनील कुमार सिंह का नाम सबसे आगे माना जा रहा था।
दिलचस्प बात यह रही कि नामांकन के दौरान सुनील कुमार सिंह अकेले ही विधानसभा पहुंचे। उनके साथ राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव या लालू परिवार का कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं था। बताया जा रहा है कि लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव फिलहाल दिल्ली में हैं, जिसके कारण वे नामांकन प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके। सूत्रों के अनुसार, इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को प्रस्तावित है, जिसमें तेजस्वी यादव के शामिल होने की संभावना है। इसी कारण वह दिल्ली में मौजूद हैं। वहीं लालू प्रसाद यादव भी हाल ही में सिंगापुर से नियमित स्वास्थ्य जांच के बाद भारत लौटे हैं। इन परिस्थितियों के चलते महागठबंधन की ओर से उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा नहीं हो सकी।
गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव के लिए 18 जून को मतदान निर्धारित है। यदि सभी 10 सीटों के लिए केवल 10 उम्मीदवार ही नामांकन दाखिल करते हैं, तो मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा सकते हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार विधान परिषद चुनाव में एक सीट जीतने के लिए लगभग 25 मतों की आवश्यकता होती है। वर्तमान संख्या बल को देखते हुए महागठबंधन की एक सीट लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है। ऐसे में सुनील कुमार सिंह का दोबारा उम्मीदवार बनाया जाना महागठबंधन की रणनीति और विश्वास का संकेत माना जा रहा है।