गौरवशाली विरासत का जश्न कल, 78वां स्थापना दिवस मनाएगा रामदयालु सिंह महाविद्यालय
- Post By Admin on Jul 18 2026
मुजफ्फरपुर : शहर के प्रतिष्ठित रामदयालु सिंह महाविद्यालय में रविवार को 78वां स्थापना दिवस समारोह पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया जाएगा। समारोह की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। महाविद्यालय प्रशासन ने इसे ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार ने बताया कि समारोह में बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय, बीएन मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रिपुसूदन श्रीवास्तव, कुलसचिव डॉ. समीर कुमार शर्मा, विश्वविद्यालय के अन्य पदाधिकारी, महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य, सेवानिवृत्त शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार तथा बड़ी संख्या में पूर्ववर्ती छात्र शामिल होंगे।
महाविद्यालय का इतिहास भी उतना ही गौरवशाली रहा है। वर्ष 1948 में स्थापित इस शिक्षण संस्थान की शुरुआत मात्र 292 विद्यार्थियों और आठ शिक्षकों के साथ हुई थी। वर्तमान में 57 एकड़ परिसर में फैले इस महाविद्यालय में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों में 13 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यह महाविद्यालय प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी एवं बिहार विधानसभा के प्रथम सभापति स्वर्गीय रामदयालु बाबू के नाम पर स्थापित किया गया था। 5 मई 1948 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। संस्थान की स्थापना में शिक्षा प्रेमी महंत दर्शन दास, महेश प्रसाद सिंह, त्रिवेणी बाबू, ललितेश्वर प्रसाद शाही, श्री नारायण महंथ और जय मंगल शर्मा सहित कई समाजसेवियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
महाविद्यालय के पहले प्राचार्य हक्कू साहब कश्मीर से थे, जबकि वरिष्ठ शिक्षक ठाकुर प्रसाद सिंह बाद में बिहार के शिक्षा मंत्री भी बने। वर्षों के दौरान महाकवि जानकी वल्लभ शास्त्री, प्रो. सुरेंद्रनाथ दीक्षित, जी.डी. कटियार, प्रो. उदय बाबू, प्रो. गोपेश्वर सिंह, प्रो. मदन कश्यप और डॉ. प्रभाकर सिन्हा जैसे विद्वानों ने इस संस्थान की शैक्षणिक एवं साहित्यिक विरासत को समृद्ध किया। आज रामदयालु सिंह महाविद्यालय न केवल उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों की पहली पसंद बन चुका है, बल्कि खेल, कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान वैश्विक शैक्षणिक पहचान स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है।