पटना में रंग, राग और रस का संगम: तीन दिवसीय राष्ट्रीय नृत्य, शिल्प एवं व्यंजन महोत्सव इंद्रधनुष का भव्य समापन
- Post By Admin on Feb 01 2026
पटना: पूर्व क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, कोलकाता द्वारा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार तथा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय नृत्य, शिल्प एवं व्यंजन महोत्सव ‘इंद्रधनुष’ का भव्य आयोजन 30 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक प्रतिदिन शाम 04:30 बजे से प्रेमचंद रंगशाला में किया गया। लोक-परंपराओं, शिल्प और व्यंजनों की जीवंत छटा से सजे इस महोत्सव ने राजधानी पटना को देशभर की सांस्कृतिक विविधताओं से रूबरू कराया।
इस महोत्सव का सम्पादन श्री तापस सामंतराय, उप निदेशक, पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, कोलकाता तथा श्री राजर्षि चंद्रा, सहायक अभियंता, पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा स्थानीय रंगकर्मियों के सहयोग से किया गया।
पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन स्थापित सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों में से एक है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकीकरण की भावना को सुदृढ़ करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सांस्कृतिक रूप से जोड़ना है। इसके अंतर्गत असम, बिहार, झारखंड, मणिपुर, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। यह केंद्र लोक, आदिवासी एवं शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण, नवाचार और प्रचार-प्रसार में वर्षों से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
- सात रंगों में सजी ‘इंद्रधनुष’ की सांस्कृतिक छटा
राष्ट्रीय महोत्सव ‘इंद्रधनुष’ लोक नृत्य, लोक गीत, लोक नाटक, लोक चित्रकला, पारंपरिक वेशभूषा, लोकशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों—इन सात पहलुओं को समेटे हुए था। इस प्रतिष्ठित आयोजन में देशभर से लगभग 500 लोक एवं आदिवासी कलाकारों और शिल्पकारों ने भाग लिया।
ओडिशा का घुबुकुडू नृत्य, पश्चिम बंगाल का बोरोमेच नृत्य, असम का बिहू, राजस्थान का कालबेलिया, उत्तर प्रदेश के होली और मयूर नृत्य, उत्तराखंड का छपेली तथा बिहार के झिझिया और जट-जटिन जैसे नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश के पारंपरिक शिल्प व व्यंजनों ने महोत्सव को और भी जीवंत बना दिया।
- समापन संध्या में बिखरा लोकसंस्कृति का रंग
दिनांक 1 फरवरी 2026 को शाम 5:00 बजे समापन समारोह आयोजित हुआ। 5:30 बजे उमेश सिंह एवं समूह द्वारा लोकगीतों की प्रस्तुति दी गई। 6:00 बजे रंग समूह, पटना ने बिहार का लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जबकि 6:15 बजे भोजपुर माटी संस्कृति न्यास द्वारा बिदेसिया लोकगीत की भावपूर्ण प्रस्तुति हुई।
6:45 बजे उदय सिंह एवं समूह ने बिहार का लोकनृत्य प्रस्तुत किया और 7:00 बजे विभिन्न राज्यों के कलाकारों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा का भव्य प्रदर्शन किया गया। 7:30 बजे सात राज्यों के लोक कलाकारों की कोरियोग्राफिक प्रस्तुति ‘इंद्रधनुष’ के साथ महोत्सव का औपचारिक समापन हुआ।कार्यक्रम के अंत में श्री तापस सामंतराय ने दर्शकों, आमंत्रित कलाकारों तथा मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए तीन दिवसीय महोत्सव के सफल आयोजन के लिए सभी सहयोगियों को धन्यवाद दिया। नृत्य संयोजन का दायित्व राजीव कुमार रॉय ने निभाया। महोत्सव में पश्चिम बंगाल, असम, राजस्थान सहित अन्य राज्यों से आए अनेक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक विविधता की अनुपम झलक पेश की। इस अवसर पर स्थानीय सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में कलाप्रेमी दर्शक और मीडिया के बंधुजन उपस्थित रहे।
तीन दिनों तक चला यह महोत्सव न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का सशक्त मंच बना, बल्कि “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” की भावना को भी सजीव रूप में प्रस्तुत करता नजर आया।