नृत्य, शिल्प और जायके का संगम : इंद्रधनुष में उमड़ी 500 लोक कलाकारों की टोली

  • Post By Admin on Jan 31 2026
नृत्य, शिल्प और जायके का संगम : इंद्रधनुष में उमड़ी 500 लोक कलाकारों की टोली

पटना : बिहार की राजधानी पटना स्थित प्रेमचंद रंगशाला लोक कला, संगीत और परंपराओं के इंद्रधनुषी रंगों से सराबोर हो उठी। पूर्व क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (EZCC), कोलकाता द्वारा बिहार सरकार और भारत सरकार के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय नृत्य, शिल्प एवं व्यंजन महोत्सव “इंद्रधनुष” का भव्य आगाज हुआ।

महामहिम राज्यपाल ने किया दीप प्रज्वलन

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन बिहार के माननीय राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान के करकमलों द्वारा किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के सचिव श्री प्रणव कुमार, निदेशक श्रीमती रूबी, EZCC के उप निदेशक श्री तापस सामंतराय और सहायक अभियंता श्री राजर्षि चंद्रा भी उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत कलाकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोक धुनों के साथ भव्य तरीके से किया।

500 कलाकारों का महाकुंभ: एक मंच पर पूरा भारत

महोत्सव के पहले दिन भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। महोत्सव की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  •  सांस्कृतिक प्रस्तुतियां : उद्घाटन के बाद सातों राज्यों के लोक नर्तकों ने एक विशेष कोरियोग्राफिक प्रस्तुति 'इंद्रधनुष' पेश की। इसके बाद पटना की साधना कुमारी एवं समूह, अमान खान की कव्वाली और प्रांगण (पटना) के कलाकारों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
  •  विविध नृत्य रूप : आगामी दिनों में यहाँ ओडिशा का घुबुकुडू, पश्चिम बंगाल का बोरोमेच, राजस्थान का प्रसिद्ध कालबेलिया, उत्तर प्रदेश का मयूर नृत्य और बिहार के झिझिया-जट-जटिन जैसे नृत्यों की ऊर्जावान प्रस्तुतियाँ होंगी।
  •  शिल्प और व्यंजन मेला : रंगशाला परिसर में पारंपरिक शिल्प मेला और खान-पान स्टॉल लगाए गए हैं, जहाँ लोग विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प और लजीज व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।

सांस्कृतिक एकीकरण का माध्यम है EZCC

पूर्व क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (EZCC) का मुख्य उद्देश्य असम, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों सहित 9 राज्यों की लुप्तप्राय कलाओं का संरक्षण और प्रचार-प्रसार करना है। महोत्सव के माध्यम से केंद्र लोक कलाकारों को एक मंच प्रदान कर राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा दे रहा है।

कल के विशेष आकर्षण

महोत्सव के दूसरे दिन यानी 31 जनवरी को बिहार के लोकगीतों और नृत्यों के साथ-साथ सात राज्यों के कलाकारों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा प्रदर्शन (Fashion Show based on Traditional Attire) किया जाएगा, जो दर्शकों के लिए एक विशेष आकर्षण होगा।