अजीबोगरीब : जीवित दरोगा ने खुद को किया था मृत घोषित, 14 वर्ष बाद पर्दाफाश
- Post By Admin on Feb 01 2026
मुजफ्फरपुर : जिले के चर्चित मानवाधिकार मामलों से जुड़े अधिवक्ता एस.के. झा ने एक अनोखे और प्रतीकात्मक कदम के तहत दरोगा रामचंद्र सिंह का जीवित रहते ही हिंदू रीति-रिवाज से गयाजी में श्राद्ध कर दिया। इस श्राद्ध कर्म के माध्यम से अधिवक्ता ने न सिर्फ एक पुराने विवादित मामले को फिर से सार्वजनिक किया, बल्कि प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बताया गया कि करीब 14 वर्ष पूर्व दरोगा रामचंद्र सिंह ने अदालत में खुद का डेथ सर्टिफिकेट दाखिल कर स्वयं को मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद वह कोर्ट की नजरों से ‘ट्रेसलेस’ हो गया था। उसी समय अधिवक्ता एस.के. झा ने सार्वजनिक रूप से जनेऊ तोड़कर यह संकल्प लिया था कि जब तक दरोगा को जीवित साबित नहीं कर देंगे, तब तक दोबारा जनेऊ धारण नहीं करेंगे। लगभग 12 वर्ष बाद जब अधिवक्ता ने प्रमाण सहित दरोगा को जीवित खोज निकाला, तब जाकर उन्होंने पुनः जनेऊ धारण किया।
हालांकि कोर्ट के रिकॉर्ड में आज भी रामचंद्र सिंह को मृत ही माना जाता है। इसी को आधार बनाकर अधिवक्ता ने अपने संकल्प के 14 वर्ष पूरे होने पर गयाजी में विधिवत श्राद्ध कर्म किया। इस दौरान पिंडदान किया गया और ब्राह्मणों को भोजन भी कराया गया।
अधिवक्ता एस.के. झा ने कहा कि यह श्राद्ध किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध है, जिसमें गलत जांच करने वाला पुलिस अधिकारी वर्षों तक बच निकलता है, जबकि निर्दोष व्यक्ति को जेल में सजा भुगतनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि दरोगा द्वारा जीवित रहते खुद को मृत घोषित कर देना और विभाग द्वारा उस पर कोई कार्रवाई न करना, व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
मामला वर्ष 2012 का है, जब अहियापुर थाना क्षेत्र के नेउरी गांव निवासी शिक्षक अनंत राम को एक कथित झूठे दुष्कर्म मामले में फंसा दिया गया था। इस केस के जांच अधिकारी दरोगा रामचंद्र सिंह थे। गलत जांच के आधार पर अनंत राम को जेल भेजा गया और चार्जशीट दाखिल कर दी गई। बाद में ट्रायल के दौरान सच्चाई सामने आई और दरोगा को गवाही के लिए कोर्ट में बुलाया गया। तभी दरोगा ने अपनी पत्नी की मदद से कोर्ट में अपना डेथ सर्टिफिकेट जमा करा दिया, जिसमें मृत्यु तिथि 15 दिसंबर 2009 दर्शाई गई थी, जबकि उसी दरोगा ने 2012 में इस केस की जांच की थी।
इस विरोधाभास को अधिवक्ता एस.के. झा ने उजागर किया और सवाल उठाया कि 2009 में मृत व्यक्ति 2012 में जांच कैसे कर सकता है। कोर्ट के आदेश पर जांच शुरू हुई, लेकिन दरोगा ने ट्रांसफर करा लिया और फिर से ट्रेसलेस हो गया। इसके बावजूद निचली अदालत ने शिक्षक अनंत राम को सात साल की सजा सुना दी। बाद में पटना हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर शिक्षक को बाइज्जत बरी कर दिया और उनकी नौकरी भी बहाल हो गई।
अधिवक्ता झा का कहना है कि दरोगा रामचंद्र सिंह आज भी जीवित है और अरवल जिले के कुर्था थाना क्षेत्र के गौहरा गांव का मूल निवासी है, जो वर्तमान में पटना में रह रहा है। बावजूद इसके वह कोर्ट के रिकॉर्ड में मृत ही दर्ज है। इसी विडंबना को उजागर करने के लिए उन्होंने गयाजी में श्राद्ध कर प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था को झकझोरने का प्रयास किया है।