आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम, छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य

  • Post By Admin on Mar 24 2026
आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम, छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य

लखीसराय : चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व चैती छठ के तीसरे दिन मंगलवार को संध्या अर्घ्य के अवसर पर पूरे जिले में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। किऊल नदी के विभिन्न घाटों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के नदी, पोखर और तालाबों में बड़ी संख्या में छठ व्रती एकत्रित हुए और अस्ताचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर पूजा-अर्चना की। कई श्रद्धालुओं ने घरों के आंगन और छतों पर बनाए गए कृत्रिम घाटों पर भी विधि-विधान से संध्या अर्घ्य दिया।

व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। शास्त्रों के अनुसार संध्या अर्घ्य का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस अवसर पर श्रद्धालु डूबते सूर्य को नमन करते हैं, जो जीवन के हर अंत में नई शुरुआत की आशा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि छठी मैया की कृपा से संतान को दीर्घायु और रोगमुक्त जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

छठ व्रतियों की कठोर साधना, निर्जला उपवास और नियमों का पालन इस पर्व को और भी विशेष बनाता है। पंचांग के अनुसार मंगलवार को सूर्यास्त शाम 5:58 बजे हुआ, जिसके साथ ही घाटों पर श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया।

आचार्य हरिशंकर पांडे के अनुसार हिंदू धर्म में चार दिनों तक चलने वाले छठ पर्व के तीसरे दिन का विशेष महत्व होता है। इस दिन व्रती घाटों पर एकत्रित होकर सूर्य उपासना करते हैं और छठी मैया की पूजा-अर्चना करते हैं।

छठ पूजा के दौरान सुहागिन महिलाएं नाक से लेकर मांग तक लंबा सिंदूर लगाती हैं, जिसे पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन की खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं लाल के बजाय नारंगी रंग का सिंदूर लगाती हैं, क्योंकि नारंगी रंग सूर्य का प्रतीक माना जाता है और छठ पर्व सूर्य उपासना का पर्व है।

छठ महापर्व पर उगते और डूबते सूर्य दोनों की उपासना का विशेष महत्व है। व्रती तांबे के लोटे में जल, रोली, लाल फूल, चावल और शक्कर डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और “ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “आदित्याय नमः” मंत्र का जाप करते हैं।

बुधवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन होगा। इस अवसर को लेकर घाटों और आसपास के क्षेत्रों में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।