बिहार में बदल सकती है सत्ता की तस्वीर, 14 अप्रैल को बड़ा फैसला संभव
- Post By Admin on Apr 11 2026
पटना : बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद अब राज्य में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार माना जा रहा है कि नीतीश कुमार 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि 15 अप्रैल को राज्य में नई सरकार के गठन की संभावना जताई जा रही है।
इसी क्रम में शनिवार को भी राजधानी पटना में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं के साथ बैठक करने वाले हैं। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की भी महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
राजनीतिक हलकों में लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि आगामी समय में मुख्यमंत्री पद भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता को दिया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम संभावित दावेदारों में सबसे आगे बताया जा रहा है।
इधर मुख्यमंत्री आवास एक अणे मार्ग पर भी हलचल बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार का सामान एक अणे मार्ग से सात सर्कुलर रोड स्थित आवास में स्थानांतरित किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय से सात सर्कुलर रोड को व्यवस्थित किया जा रहा था और अब वहां आवश्यक फाइलें, फर्नीचर तथा अन्य सामान पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि इस बदलाव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया है। वह लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद—चारों सदनों के सदस्य रहने वाले बिहार के चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं।
इस सूची में राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि का नाम भी शामिल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चारों विधायी सदनों की सदस्यता का अनुभव किसी भी नेता को संसदीय प्रक्रिया की व्यापक समझ प्रदान करता है, जिससे शासन और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।