लखीसराय स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक: मातृ-शिशु मृत्यु दर रोकने को बने सख्त नियम
- Post By Admin on Aug 20 2026
लखीसराय : जिला स्वास्थ्य समिति, लखीसराय की एक महत्वपूर्ण समीक्षा सह अनुश्रवण बैठक आज सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में आयोजित की गई। सिविल सर्जन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और सदर अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों, उपाधीक्षकों तथा स्वास्थ्य प्रबंधकों ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा करना और स्वास्थ्य सुविधाओं को आम जनता के लिए अधिक पारदर्शी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाना था।
बैठक का मुख्य जोर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार लाने पर रहा। सिविल सर्जन ने स्पष्ट निर्देश जारी किया कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रसव पूर्व जांच (ANC) और प्रसवोत्तर देखभाल को पूरी निष्ठा के साथ लागू किया जाए। इस क्रम में मातृ मृत्यु समीक्षा (MDSR) के तहत सभी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (High-Risk Pregnancy) की पहचान करने और समयबद्ध तरीके से उनके रक्त की अनिवार्य जांच करने का आदेश दिया गया। विशेष रूप से महिलाओं में एनीमिया यानी रक्ताल्पता की स्थिति की पहचान कर उन्हें आयरन-फोलिक एसिड की आवश्यक खुराक, उचित चिकित्सकीय उपचार और पोषण संबंधी परामर्श देने का निर्देश दिया गया। आशा एवं एएनएम कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे ऐसे सभी मामलों का नियमित फॉलो-अप करें और उनका संपूर्ण विवरण अभिलेखों में अद्यतन रखें, ताकि किसी भी जटिलता के कारण होने वाली मातृ या शिशु मृत्यु को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
समीक्षा के दौरान पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) के संचालन में प्रखंडवार प्रदर्शन की समीक्षा की गई। सिविल सर्जन ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया कि जहां हलसी प्रखंड से कुपोषित बच्चों को पहचान कर नियमित रूप से एनआरसी में भर्ती कराया जा रहा है, वहीं लखीसराय पीएचसी और बड़हिया सीएचसी से एक भी कुपोषित बच्चे का चिन्हांकन नहीं किया गया है। इस कार्यशैली को गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक (BCM) को तत्काल प्रभाव से अपने-अपने क्षेत्रों का सघन भ्रमण करने और कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें सदर अस्पताल स्थित एनआरसी में भर्ती कराने का सख्त निर्देश दिया गया।
बैठक में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन (Biomedical Waste Management) को लेकर जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा हुई। जिले में संचालित कुल 93 संबद्ध अस्पतालों और क्लिनिकों में से केवल 20 संस्थानों द्वारा ही अधिकृत संस्था 'सिनर्जी बायोवास्टे मैनेजमेंट लिमिटेड' को बायो-वेस्ट हस्तगत कराया जा रहा है, जबकि 73 संस्थान नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को अपने क्षेत्र के क्लिनिकों की सूची तैयार कर उन्हें नोटिस भेजने का निर्देश दिया गया है। चेतावनी दी गई है कि बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के तहत निर्धारित रंग-कोड वाली पॉलिथीन में कचरा हस्तगत न करने वाले संस्थानों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अस्पतालों की कार्यप्रणाली में सुधार लाते हुए सिविल सर्जन ने अनावश्यक रेफरल की प्रवृत्ति पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस चिकित्सीय कारण के रोगियों को दूसरे संस्थानों में रेफर करने से मरीजों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है। अत्यंत जटिल और आवश्यक मामलों में ही मरीजों को रेफर किया जाए। इसके साथ ही अस्पतालों के परिसरों में आवारा कुत्तों से सुरक्षा, जैव अपशिष्ट का सुरक्षित निस्तारण और आकस्मिक अग्निकांड से बचाव हेतु पुख्ता अग्निशमन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
अस्पतालों के ढांचागत विकास और सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) की तय चेकलिस्ट के अनुरूप कार्य करने, 'कायाकल्प' योजना के तहत स्वच्छता बनाए रखने तथा 'लक्ष्य' (LAQSHYA) कार्यक्रम के अंतर्गत सदर अस्पताल के लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर को मानकों के अनुरूप आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, 'मुस्कान' कार्यक्रम के तहत शून्य से 12 वर्ष तक के बच्चों का समयबद्ध संपूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करने और गैर-संचारी रोग (NCD) कार्यक्रम के तहत शत-प्रतिशत मरीजों के बीपी व शुगर की जांच कर उनका आंकड़ा 'भव्या' और HMIS पोर्टल पर अनिवार्य रूप से प्रविष्ट करने का निर्देश देते हुए बैठक का समापन किया गया।