भारत-अमेरिका ट्रेड डील से पहले टैरिफ का झटका, 10% शुल्क लागू
- Post By Admin on Jul 24 2026
वॉशिंगटन : अमेरिका ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से जुड़े मामलों की जांच पूरी होने के बाद भारत से आयात होने वाले सामान पर 10 प्रतिशत नया टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत कई महीनों तक चली जांच के बाद लिया गया। शुरुआत में भारत पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन अंतिम निर्णय 10 प्रतिशत शुल्क लागू करने का हुआ। इसी दर पर पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत कई एशियाई और लैटिन अमेरिकी देशों को भी रखा गया है। अमेरिका ने कुल 60 देशों पर यह नया टैरिफ लागू किया है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों ने जबरन मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। नया टैरिफ फरवरी में लागू किए गए अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क की जगह लेगा। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर ने कहा कि यह कदम मानवाधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि सेक्शन 301 के तहत अमेरिका उन देशों के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई कर सकता है, जिन पर अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापारिक गतिविधियों का आरोप हो। ट्रंप प्रशासन ने मार्च में भारत के खिलाफ फोर्स्ड लेबर और अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में जांच शुरू की थी। इनमें फोर्स्ड लेबर की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से जुड़ी जांच अभी जारी है।
जांच के दौरान भारत सरकार और उद्योग संगठनों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि देश में जबरन मजदूरी पर रोक लगाने के लिए संविधान सहित कई प्रभावी कानूनी प्रावधान पहले से लागू हैं। इसी बीच भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत जारी है। फरवरी में दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक ढांचे पर सहमति बनी थी, जिसके तहत भारतीय निर्यात पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान की खरीद और अमेरिकी उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच देने की पेशकश की थी।
हालांकि, भारत के लिए चिंता का विषय सेक्शन 301 के तहत चल रही दूसरी जांच है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि 18 प्रतिशत टैरिफ भारत को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकता है, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन के वैश्विक रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद स्थिति में अनिश्चितता बढ़ गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान, श्रीलंका और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों पर कुल टैरिफ भारत की तुलना में कम रहता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित हो सकती है। ट्रेड विशेषज्ञ मार्क लिंस्कॉट के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते की अधिकांश शर्तों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन भारत चाहता है कि उसे अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में स्पष्ट रूप से बेहतर टैरिफ का लाभ मिले।