वर्तमान सन्दर्भ में पुराणों की प्रासंगिकता पर बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में विशिष्ट व्याख्यान
- Post By Admin on Jan 08 2026
मुजफ्फरपुर : बी. आर. ए. बिहार विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के तत्वावधान में गुरुवार को विभाग की स्मार्ट कक्षा में *“पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता”* विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मध्याह्न 12 बजे हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.) दिनेश चन्द्र राय मुख्य अतिथि एवं संरक्षक के रूप में उपस्थित रहे।
कुलपति प्रो. राय ने विश्वविद्यालय के 75वें स्थापना वर्ष के अवसर पर संस्कृत विभाग द्वारा प्रस्तावित बारह मासिक व्याख्यानों की सराहना करते हुए विभाग को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और समाज से जोड़ने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्य वक्ता के रूप में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) राजीव रंजन सिन्हा ने सारगर्भित बीजवक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सनातन समाज की वेदों के प्रति आस्था तो बनी हुई है, लेकिन वेदों को समझने की क्षमता सामान्य जन में कम होती जा रही है। ऐसे में पुराण वेदों के संदेशों को सरल रूप में प्रस्तुत कर समाज का मार्गदर्शन करते हैं तथा निषिद्ध कर्मों से विरक्ति और करणीय कर्मों की ओर प्रवृत्ति उत्पन्न करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन विभागीय आचार्या प्रो. नीभा शर्मा ने किया, जबकि प्रो. मनोज कुमार ने अतिथियों, विद्वानों एवं छात्रों का स्वागत किया। विभाग की ओर से धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संगीता अग्रवाल ने किया। यह ज्ञानवर्धक व्याख्यान संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. श्यामबाबू शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। आयोजन को सफल बनाने में सहायक प्राध्यापक एवं कार्यक्रम सहसंयोजक डॉ. मनीष कुमार झा की विशेष भूमिका रही।
इस अवसर पर प्रो. वीणा मिश्रा, डॉ. रामजी मेहता, प्रो. राजीव कुमार, प्रो. अमरेन्द्र ठाकुर, प्रो. माहेश्वर प्रसाद, प्रो. ब्रह्मचारी व्यासनन्दन शास्त्री, प्रो. मधुशालिनी, प्रो. विनम्रता, सहायक प्राध्यापक दिव्यम प्रकाश सहित अनेक संस्कृत प्रेमी विद्वान एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पुराण आज भी समाज को नैतिकता, संस्कृति और जीवन मूल्यों की दिशा दिखाने में प्रासंगिक हैं।