शीतलपुर: जहां एक शिक्षक की विदाई शब्द नहीं, संवेदना बन गई

  • Post By Admin on Feb 23 2026
शीतलपुर: जहां एक शिक्षक की विदाई शब्द नहीं, संवेदना बन गई

पूर्वी चंपारण: स्थानांतरण के बाद वैशाली जा चुके एक शिक्षक की शीतलपुर वापसी रविवार को भावनाओं से भरे अविस्मरणीय क्षणों की साक्षी बनी। उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय, शीतलपुर के बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों के विशेष आग्रह पर पहुंचे शिक्षक का स्वागत ऐसा रहा, जिसने पूरे परिसर को भावुक कर दिया।

विद्यालय परिसर में सुबह से ही विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। जैसे ही शिक्षक स्वयं गाड़ी चलाकर कैंपस में पहुंचे, बच्चों का सैलाब उनकी ओर दौड़ पड़ा। गाड़ी से उतरते ही कई विद्यार्थी उनसे लिपटकर रो पड़े। उपस्थित लोगों के अनुसार, माहौल में अपनापन और बिछड़ने की टीस एक साथ महसूस की जा रही थी। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में पंडाल एवं समियाना लगाया गया था। मंचीय कार्यक्रम में बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संबोधन और स्वागत समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में कल्याणपुर के विधायक सचिंद्र प्रसाद सिंह सहित अनेक सम्मानित ग्रामीण मौजूद रहे। वक्ताओं ने शिक्षक के कार्यकाल, विद्यार्थियों के प्रति समर्पण और विद्यालय में दिए गए योगदान को याद किया।

कार्यक्रम के अंत में विदाई का क्षण सबसे अधिक मार्मिक रहा। विद्यालय की छात्राएं और छात्र भावुक होकर रो पड़े। कई बच्चों ने शिक्षक के प्रति अपने लगाव और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। शिक्षकों एवं कर्मचारियों की आंखें भी नम दिखीं। विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका अनीता देवी, शिक्षिका अनुपमा पांडेय, प्रिया कुमारी, सरिता कुमारी, संगीता कुमारी, फिरदौस आरजू, नजमा खातून, शिक्षक अभिषेक कुमार, मोहम्मद मासूम रेजा राही, मुकेश पासवान, अरविंद कुमार, लिपिक आकाश कुमार, शिक्षा सेवक राजू कुमार तथा रात्रि प्रहरी महावीर पासवान सहित विद्यालय परिवार ने शिक्षक को स्मृति-चिह्न एवं उपहार भेंट किए। कुछ शिक्षक मैट्रिक परीक्षा में कर्तव्य निर्वहन के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

विदाई के दौरान शिक्षक ने विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए शिक्षा और अनुशासन के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। परिसर से प्रस्थान के समय कई बच्चे, शिक्षक और ग्रामीण गाड़ी के साथ बाहर तक चले, जिससे दृश्य और भी भावुक हो उठा।

ग्रामीणों और विद्यालय परिवार ने कहा कि शिक्षक का विद्यार्थियों से रिश्ता औपचारिक सीमाओं से परे होता है। यह संबंध स्नेह, विश्वास और मार्गदर्शन की नींव पर टिका रहता है। समारोह ने इसी भावनात्मक बंधन को उजागर किया।