नीट-पीजी कट-ऑफ घटाने पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में बचाव, कहा—मेरिट से कोई समझौता नहीं

  • Post By Admin on Feb 23 2026
नीट-पीजी कट-ऑफ घटाने पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में बचाव, कहा—मेरिट से कोई समझौता नहीं

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल में कमी के फैसले का सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से बचाव किया है। दायर हलफनामे में केंद्र ने स्पष्ट कहा कि इस निर्णय से न तो शैक्षणिक मानकों से कोई समझौता हुआ है और न ही क्लिनिकल क्षमता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

सरकार ने कहा कि नीट-पीजी का उद्देश्य एमबीबीएस की न्यूनतम योग्यता को प्रमाणित करना नहीं, बल्कि सीमित पोस्टग्रेजुएट सीटों के लिए अंतर-से मेरिट सूची तैयार करना है। पर्सेंटाइल में कमी के बाद भी सीटों का आवंटन उम्मीदवारों की मेरिट और उनकी प्राथमिकता के आधार पर ही किया जाता है।

हलफनामे में कहा गया कि क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाना एक आनुपातिक प्रशासनिक कदम है, जिसका उद्देश्य सीटों की बर्बादी रोकना और देश में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को मजबूत करना है। सरकार के अनुसार, राउंड-3 की काउंसलिंग के बाद भी 2988 सीटें खाली रह गई हैं, जो अगले चरण में उपलब्ध नहीं होंगी।

केंद्र ने बताया कि नीट-पीजी में बैठने के लिए उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त एमबीबीएस डिग्री और अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप पूरी होना आवश्यक है। एमबीबीएस में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं। सभी अभ्यर्थी पहले NEET-UG या अन्य प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से एमबीबीएस में प्रवेश लेते हैं।

हलफनामे में यह भी उल्लेख किया गया कि नीट-पीजी एक प्रतिस्पर्धी रैंकिंग परीक्षा है, जिसमें 200 बहुविकल्पीय प्रश्न (कुल 800 अंक) होते हैं और 25 प्रतिशत नेगेटिव मार्किंग लागू है। कम या निगेटिव अंक प्राप्त होना परीक्षा की संरचना का परिणाम हो सकता है, जिसे क्लिनिकल अयोग्यता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए लगभग 70,000 पीजी सीटें उपलब्ध थीं, जबकि परीक्षा में 2,24,029 उम्मीदवार शामिल हुए। ऑल इंडिया कोटा के तहत 31,742 सीटें थीं, जिनमें राउंड-2 के बाद 9621 सीटें खाली रह गईं।

सरकार ने बताया कि 2017 में नीट-पीजी की शुरुआत के बाद से विशेष परिस्थितियों में पर्सेंटाइल घटाने की परंपरा रही है। शैक्षणिक वर्ष 2023 में सभी श्रेणियों के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल शून्य तक किया गया था। मौजूदा फैसला भी स्थापित नीतियों के अनुरूप है।

केंद्र ने यह भी कहा कि आमतौर पर न्यायालय विशेषज्ञ निकायों के शैक्षणिक और नीतिगत फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करते, जब तक वे मनमाने या असंवैधानिक न हों। मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठाई गई चिंताओं को निराधार बताते हुए कहा गया कि पोस्टग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश पाने वाले सभी उम्मीदवार लाइसेंसधारी एमबीबीएस चिकित्सक हैं, जो वरिष्ठ विशेषज्ञों की निगरानी में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

यह परीक्षा National Board of Examinations in Medical Sciences (एनबीईएमएस) द्वारा आयोजित की जाती है, जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल से जुड़े निर्णय National Medical Commission और अन्य संबंधित प्राधिकरणों से परामर्श के बाद लिए जाते हैं।

यह हलफनामा 13 जनवरी 2026 को जारी नोटिस के खिलाफ दायर याचिका के संदर्भ में दाखिल किया गया है, जिसमें नीट-पीजी 2025-26 के तीसरे राउंड की काउंसलिंग के लिए कट-ऑफ पर्सेंटाइल में कमी की गई थी। याचिका हरिशरण देवगन और अन्य की ओर से दायर की गई है।