रामेश्वर महाविद्यालय में पूर्ववर्ती छात्र समागम, परिषद् का गठन
- Post By Admin on Sep 15 2026
मुजफ्फरपुर: रामेश्वर महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर में पूर्ववर्ती छात्रों को साझा मंच पर लाने, महाविद्यालय से उनके आत्मीय संबंधों को मजबूत करने तथा संस्थान के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूर्ववर्ती छात्र समागम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूर्ववर्ती छात्र परिषद् का गठन करते हुए विभिन्न पदाधिकारियों और कार्यकारी सदस्यों का सर्वसम्मति से चयन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाबा साहेब भीमराव अंबेदकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय थे। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. श्यामल किशोर ने स्वागत अभिभाषण दिया। कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. उपेंद्र प्रसाद ने किया, जबकि आयोजन सचिव राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. गोवर्धन रहे। समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की पहचान केवल उसकी वर्तमान उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि उसके पूर्ववर्ती छात्रों की उपलब्धियां भी संस्थान की प्रतिष्ठा और गौरव को निर्धारित करती हैं। पूर्ववर्ती छात्र किसी भी महाविद्यालय की अमूल्य पूंजी होते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का महाविद्यालय से रिश्ता शिक्षा पूरी करने के बाद समाप्त नहीं होता, बल्कि जीवनभर बना रहता है। कुलपति ने कहा कि पूर्ववर्ती छात्र अपने अनुभव, ज्ञान, विशेषज्ञता और सामाजिक संपर्कों के माध्यम से संस्थान तथा वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत बन सकते हैं। पूर्ववर्ती छात्र परिषद् के गठन से महाविद्यालय और पूर्व छात्रों के बीच संवाद को संस्थागत स्वरूप मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि परिषद् महाविद्यालय के विकास में रचनात्मक भूमिका निभाएगी तथा वर्तमान विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक, व्यावसायिक और सामाजिक अवसरों के निर्माण में सहयोग करेगी।
प्राचार्य प्रो. श्यामल किशोर ने कहा कि पूर्ववर्ती छात्र महाविद्यालय की जीवंत विरासत हैं और उनकी सफलता संस्थान के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद पूर्ववर्ती छात्रों का एक मंच पर जुटना भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ महाविद्यालय के भविष्य के लिए भी उपयोगी है। कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित हुआ। प्रथम सत्र में महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा, पूर्ववर्ती छात्रों की भूमिका और संस्थान के विकास में उनके योगदान की संभावनाओं पर चर्चा की गई। पूर्व छात्रों ने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा कीं और महाविद्यालय से जुड़े अनुभवों को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि पूर्ववर्ती छात्रों का अनुभव वर्तमान विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दे सकता है।
प्रथम सत्र का धन्यवाद ज्ञापन दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. रजनी रंजन ने किया। इसके बाद दूसरे सत्र में पूर्ववर्ती छात्र परिषद् के गठन और चुनाव की प्रक्रिया संपन्न हुई। कार्यक्रम सचिव डॉ. गोवर्धन ने परिषद् के गठन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित सदस्यों ने सहमति प्रदान की।पूर्ववर्ती छात्र परिषद् के अध्यक्ष पद पर प्रो. विजयेंद्र प्रसाद सिंह का चयन किया गया। उपाध्यक्ष के रूप में प्रो. हरिश्चंद्र कुमार सिन्हा और प्रो. के.के. झा चुने गए। सचिव पद की जिम्मेदारी समाजसेवी एवं महाविद्यालय के पूर्व छात्र भूषण झा को दी गई। संयुक्त सचिव के रूप में प्रो. अवधेश कुमार सिंह और रंजन कुमार साहू का चयन हुआ। कार्यकारी सदस्यों में गणेश भारती, प्रो. उमेश प्रसाद सिंह, डॉ. रितंभरा, कुमारी शैली सिन्हा, मुकेश कुमार, सोनी कुमारी, हिमाद्रि कुमारी, डॉ. श्याम तिवारी, कुमारी मौसम, नाजिया जफर एवं रवि सिन्हा को शामिल किया गया। परिषद् के गठन के बाद पूर्ववर्ती छात्रों ने इसे महाविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल बताया। सदस्यों ने कहा कि परिषद् के माध्यम से पूर्व छात्रों के बीच नियमित संवाद कायम होगा और महाविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी। परिषद् वर्तमान विद्यार्थियों और पूर्ववर्ती छात्रों के बीच मजबूत सेतु के रूप में कार्य करेगी।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. उपेंद्र प्रसाद ने कहा कि पूर्ववर्ती छात्र समागम का उद्देश्य केवल पुराने छात्रों का पुनर्मिलन नहीं, बल्कि उनके अनुभव, ऊर्जा और उपलब्धियों को महाविद्यालय के वर्तमान एवं भावी विकास से जोड़ना है। आयोजन सचिव डॉ. गोवर्धन ने परिषद् के गठन को महत्वपूर्ण सांगठनिक उपलब्धि बताते हुए इसे सक्रिय और प्रभावी बनाने में सभी सदस्यों से सहयोग की अपील की। दूसरे सत्र के अंत में राजकीय डिग्री कॉलेज, मधुबन के प्राचार्य प्रो. व्यास नंदन शास्त्री ने धन्यवाद ज्ञापन किया। अंत में प्राचार्य प्रो. श्यामल किशोर ने उम्मीद जताई कि नवगठित परिषद् महाविद्यालय और पूर्ववर्ती छात्रों के बीच संपर्क एवं संवाद को मजबूत करेगी तथा वर्तमान विद्यार्थियों के मार्गदर्शन, शैक्षणिक उन्नयन और संस्थान के समग्र विकास में सार्थक योगदान देगी।