एमपीएस साइंस कॉलेज में राष्ट्रीय सेमिनार, भाषाई एकता को बताया राष्ट्र निर्माण की आधारशिला

  • Post By Admin on Jan 06 2026
एमपीएस साइंस कॉलेज में राष्ट्रीय सेमिनार, भाषाई एकता को बताया राष्ट्र निर्माण की आधारशिला

​​मुजफ्फरपुर : महेश प्रसाद सिन्हा साइंस कॉलेज, मुजफ्फरपुर एवं भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय (भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को “भारतीय भाषा परिवार और भाषाई एकता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन चार चरणों—उद्घाटन सत्र, दो तकनीकी सत्र और समापन सत्र—में संपन्न हुआ।

सेमिनार का उद्घाटन बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय ने दीप प्रज्वलन, मंत्रोच्चार एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के वादन के साथ किया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. राजीव कुमार एवं अन्य सदस्यों द्वारा अतिथियों को पुष्पगुच्छ, मोमेंटो और शॉल देकर सम्मानित किया गया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चंद्र राय ने कहा कि देश राष्ट्र निर्माण के स्वर्णिम काल से गुजर रहा है, जहां भाषाई एकता भारत की बहुभाषी संस्कृति को जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) मोहम्मद जहांगीर वारसी, भाषा विज्ञान विभाग, ए.एम.यू. अलीगढ़ एवं अध्यक्ष, लिंग्विस्टिक सोसाइटी ऑफ इंडिया ने भारतीय भाषा समिति द्वारा प्रकाशित दो पुस्तकों का कुलपति से विमोचन कराया। उन्होंने पाणिनी रचित अष्टाध्यायी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत विश्व में सर्वाधिक भाषाई विविधता वाला देश है। संस्कृत को सभी भारतीय भाषाओं की जननी बताते हुए उन्होंने ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना में स्थानीय भाषाओं की भूमिका को रेखांकित किया।

विशिष्ट अतिथि महाराजगंज कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुजीत कुमार चौधरी ने कहा कि कोई भी राष्ट्र अपनी मातृभाषा के माध्यम से ही वास्तविक प्रगति कर सकता है।

तकनीकी सत्रों में भाषाई चुनौतियों पर मंथन

प्रथम तकनीकी सत्र में पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनोज कुमार ने भारतीय भाषाओं के इतिहास पर चर्चा करते हुए औपनिवेशिक दौर के प्रभावों को रेखांकित किया। लंगट सिंह कॉलेज के भोजपुरी विभागाध्यक्ष डॉ. जयकांत सिंह ने सार्वजनिक मंचों पर अंग्रेजी के अत्यधिक प्रयोग पर चिंता जताई और मातृभाषा के प्रति गर्व का आह्वान किया।

ललित नारायण तिरहुत महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. ममता रानी ने वैश्वीकरण के दौर में अंग्रेजी की उपयोगिता स्वीकारते हुए हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने का सुझाव दिया और नई शिक्षा नीति (NEP-2020) से मातृभाषाओं को मिले प्रोत्साहन की चर्चा की।

इस सत्र में डॉ. कृष्ण पासवान (आर.सी.एस. कॉलेज, मंझौल) द्वारा फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ के साहित्य पर आधारित शोध पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें भारतीय भाषाओं के स्वाभाविक प्रयोग को रेखांकित किया गया। सत्र की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. राजीव कुमार ने की।

द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता पूर्व कुलपति डॉ. अमरेन्द्र कुमार यादव ने की। उन्होंने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा पर अधिक निवेश की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे पिछड़े राज्यों का समग्र विकास संभव है।

डॉ. प्रमोद कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर विचार रखे, जबकि डॉ. श्रीप्रकाश पाण्डेय ने राष्ट्र निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर जोर दिया। डॉ. ज्योति नारायण सिंह ने भाषाओं के पारस्परिक संबंधों, विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में भाषा की भूमिका को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों को सम्मानित किया गया। सेमिनार में सवा सौ से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा डॉ. वंदना श्रीवास्तव द्वारा रचित पुस्तक **“भोजपुरी कला के बहाने”** का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।