भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, यह लैंगिक पूर्वाग्रहों का वाहक भी: डॉ. शेफाली

  • Post By Admin on Mar 08 2026
भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं, यह लैंगिक पूर्वाग्रहों का वाहक भी: डॉ. शेफाली

मुजफ्फरपुर: रामदयालु सिंह महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एनएसएस इकाई एवं आइक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में “जेंडर इनइक्वलिटी इन ग्लोबल पर्सपेक्टिव” विषय पर श्री कृष्ण सभा भवन में एक परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पटना विश्वविद्यालय के सोशल साइंस की डीन डॉ. शेफाली राय ने कहा कि भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में मौजूद लैंगिक पूर्वाग्रहों को भी वहन करती है।

उन्होंने कहा कि लैंगिक असमानता और भाषाई बोध के बीच गहरा संबंध है। हिंदी सहित कई भाषाओं में मौजूद संरचनात्मक लिंग भेद लैंगिक रूढ़िवादिता को मजबूत करते हैं और समाज में असमानता को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं को अक्सर रिश्तों और भावनाओं के आधार पर बात करने वाली के रूप में देखा जाता है, जबकि पुरुषों की भाषा को अधिक मुखर और भावनाओं को दबाने वाली माना जाता है। डॉ. शेफाली राय ने कहा कि भाषाई संरचनाएं यह तय करती हैं कि हम पुरुषों और महिलाओं को किस दृष्टि से देखते हैं। शोध से यह भी सामने आया है कि जिन समाजों में भाषा में लिंग आधारित भेदभाव अधिक होता है, वहां लैंगिक असमानता भी अधिक देखने को मिलती है। उन्होंने समाज में समानता को बढ़ावा देने के लिए लिंग समावेशी भाषा के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार ने कहा कि लैंगिक असमानता का अर्थ है लिंग के आधार पर अवसरों, अधिकारों और संसाधनों तक पहुंच में भेदभाव। इसका सीधा प्रभाव शिक्षा, आय और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है। इस अवसर पर डॉ. नीलिमा झा ने फिल्मों में लैंगिक असमानता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और बताया कि सिनेमा समाज की सोच को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।परिचर्चा के दौरान शिक्षकों और छात्रों ने भी कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। इसमें डॉ. नीरज मिश्रा, डॉ. सौरभ राज, डॉ. रजनीकांत पांडे सहित कई छात्रों ने लैंगिक असमानता और लैंगिक समानता के अंतर, बच्चों के विकास पर लैंगिक रूढ़ियों के प्रभाव तथा पारंपरिक पितृसत्तात्मक सोच के कारण महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों से जुड़े सवाल उठाए।

कार्यक्रम में सिंडिकेट सदस्य डॉ. रमेश प्रसाद गुप्ता, सीनेट सदस्य डॉ. संजय कुमार सुमन, डॉ. एम.एन. रजवी, डॉ. आर.एन. ओझा, डॉ. आशुतोष मिश्रा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. आलोक त्रिपाठी, डॉ. भगवान कुमार, डॉ. आनंद प्रकाश दुबे, डॉ. हसन रजा, डॉ. ललित किशोर, डॉ. विकास कुमार, डॉ. अमीता त्रिवेदी, डॉ. आयशा जमाल, डॉ. पूजा लोहान सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन एवं विषय प्रवेश डॉ. श्रुति मिश्रा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनुराधा पाठक ने किया।