राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में शिक्षक निभाएं परिवर्तनकारी भूमिका : प्रो. रंजीत कुमार वर्मा
- Post By Admin on Jul 10 2026
मुजफ्फरपुर : विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं विद्या भारती बिहार के संयुक्त तत्वावधान में सादातपुर स्थित भारती शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय आचार्य प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, व्यक्तित्व निर्माण, मूल्यपरक शिक्षा और शिक्षक शिक्षा में क्रिया शोध (एक्शन रिसर्च) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में शिक्षक परिवर्तन के सबसे बड़े वाहक हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुंगेर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं शिक्षाविद् प्रो. (डॉ.) रंजीत कुमार वर्मा का संस्थान परिवार की ओर से अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया गया।
मुख्य वक्ता प्रो. वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल एक नीति दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन का माध्यम है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय पर आधारित है तथा इसका उद्देश्य विद्यार्थियों का समग्र व्यक्तित्व विकास करना है। उन्होंने पंचपदी शिक्षा मॉडल, अनुभवात्मक अधिगम और योग्यता आधारित शिक्षा की चर्चा करते हुए EQ, IQ और SQ के संतुलित विकास पर विशेष बल दिया। दूसरे अकादमिक सत्र में उन्होंने "उच्च शिक्षा में वैधानिक निकाय एवं गुणवत्ता नियंत्रण" विषय पर व्याख्यान देते हुए विश्वविद्यालयों की अकादमिक परिषद, सीनेट, सिंडिकेट और एफिलिएशन समिति जैसी संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इन निकायों का प्रभावी संचालन आवश्यक है। साथ ही उच्च शिक्षा में भ्रष्टाचार और बाहरी हस्तक्षेप पर चिंता व्यक्त करते हुए न्यायिक सक्रियता और प्रशासनिक पारदर्शिता को समय की जरूरत बताया। प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विषय विशेषज्ञ नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता होते हैं।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में लोक शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ने "भारतीय दृष्टिकोण में व्यक्तित्व निर्माण एवं स्व की परिकल्पना" विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य आत्मबोध, संस्कार और राष्ट्र निर्माण है। उन्होंने आदर्श शिक्षक के पांच प्रमुख गुण—छात्र हित सर्वोपरि, विषय का गहन ज्ञान, कथनी-करनी में समानता, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और व्यसनमुक्त जीवन—को शिक्षक की सफलता का आधार बताया। उन्होंने भारतीय शिक्षा दर्शन के मूल मंत्र "वसुधैव कुटुम्बकम्" और "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का उल्लेख करते हुए शिक्षकों से स्वयं आदर्श बनने का आह्वान किया।
तीसरे एवं चौथे तकनीकी सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के प्रो. रजनी रंजन ने "व्यक्तित्व विकास एवं मूल्यपरक शिक्षा" तथा "शिक्षक शिक्षा में क्रिया शोध (एक्शन रिसर्च) की भूमिका" विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा का लक्ष्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और संवेदनशील नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने शिक्षकों से कक्षा में आने वाली समस्याओं का वैज्ञानिक विश्लेषण कर क्रिया शोध के माध्यम से व्यावहारिक समाधान विकसित करने का आग्रह किया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से संवाद किया और शिक्षण, शोध एवं नवाचार से जुड़े अनेक पहलुओं पर चर्चा की। दिनभर के प्रशिक्षण सत्र के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से "वंदे मातरम्" का गायन किया तथा समूह चर्चा के माध्यम से आगामी प्रशिक्षण सत्रों की रूपरेखा और कार्ययोजना तैयार की।