एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन के बाद कार्रवाई, सीजेपी के दो नेताओं को पांच दिन की जेल

  • Post By Admin on Oct 14 2026
एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन के बाद कार्रवाई, सीजेपी के दो नेताओं को पांच दिन की जेल

नई दिल्ली : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दो नेताओं को पांच दिन की जेल की सजा सुनाए जाने की खबर सामने आई है। यह मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़ा है।

जानकारी के मुताबिक, सीजेपी के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर लगाए गए अवरोधकों को पार कर प्रतिबंधित प्रदर्शन क्षेत्र में प्रवेश किया था। इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। 14 अक्टूबर को आई रिपोर्टों में दोनों को पांच दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर विपक्ष के सवाल

विवाद की मुख्य वजह मतदाता सूची में किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष ने पुनरीक्षण की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है। 12 अक्टूबर को राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के कई नेताओं और समर्थकों ने दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय की ओर मार्च किया था। इस दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए। विपक्षी गठबंधन ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की जांच और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग भी उठाई।

चुनाव आयोग और भाजपा ने आरोपों को नकारा

मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। विपक्ष जहां नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा और चुनाव आयोग की ओर से इस प्रक्रिया का बचाव किया गया है। पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और मृत, स्थानांतरित, दोहराव वाली या अन्य कारणों से अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना बताया जाता है। ऐसे में विवाद का प्रमुख प्रश्न यह है कि सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और गलतियों को सुधारने के लिए पर्याप्त व्यवस्था किस तरह सुनिश्चित की जाए।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कार्रवाई

दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है। सीजेपी के नेताओं की हिरासत और जेल भेजे जाने की कार्रवाई के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। आंदोलन से जुड़े लोगों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासनिक कार्रवाई प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए प्रतिबंधों के उल्लंघन से संबंधित बताई गई है।

मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर जारी विवाद में अब न्यायिक प्रक्रिया, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और राजनीतिक दलों की अगली रणनीति महत्वपूर्ण होगी। पात्र मतदाताओं के नामों की सुरक्षा, सूची में त्रुटियों का सुधार और पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता इस बहस के प्रमुख विषय बने हुए हैं। फिलहाल, सीजेपी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और विपक्ष की ओर से उठाई जा रही मांगों ने चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली कानूनी और राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी।