बांकीपुर उपचुनाव में खुद चुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर, बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल

  • Post By Admin on Jul 05 2026
बांकीपुर उपचुनाव में खुद चुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर, बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल

पटना: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जन सुराज पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर स्वयं बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे। इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में नए समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है। लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर प्रशांत किशोर की दावेदारी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रशांत किशोर पहली बार स्वयं चुनाव लड़ने जा रहे हैं। अब तक देश के कई राज्यों में चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर इस बार सीधे जनता के बीच जनादेश मांगेंगे। जन सुराज का कहना है कि यह केवल एक उपचुनाव नहीं, बल्कि बिहार की वर्तमान सरकार के कामकाज और राजनीति की दिशा पर जनता की राय का चुनाव होगा।

हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी कोई सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी थी, लेकिन पार्टी का दावा है कि उसने सीमित संसाधनों के बावजूद बिहार की राजनीति में एक वैकल्पिक राजनीतिक विमर्श खड़ा किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन लगातार गांव-गांव तक अपनी पहुंच मजबूत कर रहा है और अब चुनावी मैदान में सीधे मुकाबले के लिए तैयार है।बांकीपुर सीट वर्ष 1995 से भाजपा के कब्जे में रही है। पहले पटना पश्चिम और बाद में बांकीपुर के नाम से जानी जाने वाली इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व लंबे समय तक नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने किया। उनके निधन के बाद उपचुनाव में नितिन नवीन विजयी हुए और लगातार इस सीट पर भाजपा का दबदबा कायम रहा। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने यहां लगभग 63 प्रतिशत मत प्राप्त कर बड़ी जीत दर्ज की थी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांकीपुर का जातीय और शहरी समीकरण भाजपा के पक्ष में माना जाता रहा है। इसके बावजूद प्रशांत किशोर का चुनाव मैदान में उतरना मुकाबले को दिलचस्प बना सकता है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने बिहार के विभिन्न जिलों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया है और शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य तथा व्यवस्था परिवर्तन जैसे मुद्दों को लगातार उठाया है। जन सुराज इन्हीं मुद्दों को लेकर मतदाताओं के बीच जाने की तैयारी कर रही है। उधर भाजपा भी इस सीट को हर हाल में अपने कब्जे में बनाए रखना चाहती है। पार्टी में उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन जारी है। दूसरी ओर राजद समेत विपक्षी दल भी अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं, जिससे मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना है।

प्रशांत किशोर ने इस चुनाव को बिहार की राजनीति में बदलाव का अवसर बताते हुए कहा है कि बांकीपुर की जनता यदि परिवर्तन का संदेश देती है तो उसका प्रभाव पूरे राज्य की राजनीति पर पड़ेगा। उन्होंने इसे केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को आने वाले परिणाम पर पूरे बिहार की नजर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा के लंबे समय से मजबूत रहे इस गढ़ में प्रशांत किशोर अपनी पहली चुनावी पारी में कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं और मतदाता किसे अपना समर्थन देते हैं।