अमेरिकी टैरिफ से बनारसी साड़ी उद्योग पर संकट, खतरे में हजारों बुनकरों की रोज़ी-रोटी
- Post By Admin on Aug 30 2025
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वाराणसी : विश्व प्रसिद्ध बनारसी साड़ी और रेशमी वस्त्र उद्योग पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने गहरी चोट पहुंचाई है। टैरिफ लागू होते ही अमेरिका से बड़े ऑर्डर रद्द होने लगे हैं और निर्यातकों का माल वापस लौटाया जा रहा है। इस संकट ने वाराणसी के हजारों कारीगरों की आजीविका पर सीधा असर डाला है।
वाराणसी वस्त्र उद्योग संगठन का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो शहर को सालाना 300 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजन बहल ने बताया, “टैरिफ के कारण बनारसी साड़ियों के निर्यात में 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आएगी। हैंडलूम उत्पाद सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। पहले हर साल 200 से 300 करोड़ रुपये का माल अमेरिका निर्यात होता था, लेकिन अब वह पूरी तरह खतरे में है। ऑर्डर कैंसिल हो रहे हैं और नए ऑर्डर की कोई उम्मीद नहीं दिख रही।”
उन्होंने आगे कहा कि हैंडलूम की संख्या पहले ही घट रही है और टैरिफ इस उद्योग को और कमजोर कर देगा। बहल ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि बनारसी उद्योग को बचाया जा सके।
स्थानीय व्यापारी सर्वेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि टैरिफ की मार से उनके 10 लाख रुपये का माल वापस लौटाया गया है। “मेरे यहां 20 कर्मचारी काम करते हैं और 20 लाख का माल होल्ड होने से भारी नुकसान झेलना पड़ा है। पेमेंट भी अटक गया है। बुनकरों की रोज़ी-रोटी खतरे में है।”
श्रीवास्तव ने हैंडलूम और हस्तशिल्प को जीएसटी से मुक्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 5 प्रतिशत जीएसटी हटाने से घरेलू बाजार में मांग बढ़ेगी और बनारसी साड़ियों की लोकप्रियता फिर से लौट सकती है।
उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि अमेरिकी टैरिफ ने बनारस की पारंपरिक पहचान और हजारों परिवारों की आजीविका पर बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है। यदि सरकार ने त्वरित कदम नहीं उठाए, तो बनारसी साड़ी उद्योग गहरे संकट में फंस सकता है।