वैलेंटाइन वीक में अनोखी पहल : गाय और पेड़ों को गले लगाकर मनाया गया चुंबन दिवस

  • Post By Admin on Feb 13 2026
वैलेंटाइन वीक में अनोखी पहल : गाय और पेड़ों को गले लगाकर मनाया गया चुंबन दिवस

मुजफ्फरपुर : लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान के अंतर्गत इस वर्ष किस डे/चुंबन दिवस को एक नए और प्रेरणादायी रूप में मनाया गया, जहां आधुनिक दिखावे की जगह प्रकृति, पशु-प्रेम और संवेदना का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति में निहित करुणा, स्नेह और सहअस्तित्व के मूल्यों को समाज तक पहुँचाना रहा।

अभियान के संस्थापक पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता ने बताया कि चुंबन दिवस केवल व्यक्ति विशेष तक सीमित न रहकर प्रकृति और जीवों के प्रति प्रेम का प्रतीक बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि “मीठा मुस्कुराने का संदेश — संस्कृति की खुशबू के साथ” थीम के अंतर्गत यह प्रयास किया गया कि लोग प्रेम को केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बनाएं।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आज दुनिया के कई देशों में गाय के आलिंगन और चुंबन को “थेरेपी” के रूप में देखा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर जापान में गाय को हग करने के लिए लोग पहले से बुकिंग कराते हैं, जबकि स्विट्ज़रलैंड में इसे तनाव दूर करने का अनुभव माना जाता है, जिसके लिए लोग 20 मिनट से एक घंटे तक के सत्र में 1500 से 6000 रुपये तक खर्च करते हैं।

लीचीपुरम अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भारतीय संस्कृति इन सबसे अलग है। यहाँ गाय कोई थेरेपी नहीं बल्कि माता है, स्नेह कोई सेवा नहीं बल्कि संस्कार है और आलिंगन कोई अनुभव नहीं बल्कि भावना है। जहां दुनिया पैसे देकर सुकून तलाश रही है, वहीं हमारी मिट्टी प्रेम को जीवन जीने का तरीका सिखाती है।

कार्यक्रम के दौरान लोगों से आह्वान किया गया कि वे पेड़ों को गले लगाएं, गौ माता को स्नेह दें, प्रकृति से जुड़ें और यह दिखाएं कि प्रेम खरीदा नहीं जाता, बल्कि जिया जाता है।

यह आयोजन अभिनव निशुल्क शिक्षा केंद्र, रंभा चौक कन्हौली, गुड शेफर्ड स्कूल दादर और किड्स वैली स्कूल अयाची ग्राम के प्राकृतिक वातावरण में आयोजित हुआ। इसमें निदेशक श्रीमती अर्चना सिंह, समाजसेवी अनिल कुमार अनल, डॉ. अमित कुमार, गौरव राज, सुनील कुमार पिंटू, दीपांशु ठाकुर, बबलू शाही, मोहम्मद बाजपेई सहित दर्जनों किसान, शिक्षक और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का मूल संदेश रहा — LOCAL PRIDE — GLOBAL RIDE, अर्थात लीचीपुरम संस्कृति, संस्कार और संवेदना की पहचान बनकर वैश्विक स्तर पर प्रेम और सहअस्तित्व का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।