मोतीपुर अग्निकांड में 7 मौत के मामलें को कोर्ट ने माना गंभीर, पुलिस को अविलंब FIR दर्ज कर जांच का आदेश

  • Post By Admin on Jan 16 2026
मोतीपुर अग्निकांड में 7 मौत के मामलें को कोर्ट ने माना गंभीर, पुलिस को अविलंब FIR दर्ज कर जांच का आदेश

मुजफ्फरपुर : मोतीपुर थाना क्षेत्र में एक ही परिवार के सात लोगों की दर्दनाक मौत के मामले में अदालत ने पुलिस की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए अविलंब एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। एसीजेएम-प्रथम, पश्चिमी मुजफ्फरपुर की अदालत ने इसे अत्यंत गंभीर मामला मानते हुए मोतीपुर पुलिस को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है।

मामला गत वर्ष 15 नवंबर का है, जब मोतीपुर थाना क्षेत्र के नगर पंचायत वार्ड संख्या-13 में सुबह करीब 5:34 बजे आग लगने की घटना में एक ही परिवार के सात सदस्यों की जलकर मौत हो गई थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शवों को कब्जे में लेकर एसकेएमसीएच भेजा गया, जहां घायलों का इलाज हुआ और मृतकों का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बावजूद पुलिस ने अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की थी।

इस मामले में परिवादी मनोज कुमार, जो वर्तमान में नई दिल्ली में रहते हैं, ने कोर्ट को बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही वे मोतीपुर पहुंचे और अपनी बहन, बहनोई तथा दो भगिनियों समेत परिवार के सात सदस्यों को खो दिया। उन्होंने मोतीपुर थाना में लिखित आवेदन देकर एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस द्वारा लगातार टाल-मटोल किया गया और अंततः प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। परिवादी ने अदालत को बताया कि जिस कमरे में लोग सो रहे थे, आग सिर्फ उसी कमरे के बेड पर लगी थी। हैरानी की बात यह है कि उस कमरे में न तो खिड़की थी और न ही दरवाजा, जबकि परिवार के अन्य सदस्य अलग-अलग कमरों में सो रहे थे। इससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा हो जाता है।

मनोज कुमार ने अपने परिवाद-पत्र में यह भी आरोप लगाया कि सभी को पहले नशीली दवा देकर बेहोश किया गया और फिर आग लगाकर हत्या की गई। उनका कहना है कि यदि पुलिस ईमानदारी से जांच करे तो मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी की ओर से मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस.के. झा ने जोरदार बहस की। उनकी दलीलों को सुनने के लिए कोर्ट रूम खचाखच भरा रहा। अधिवक्ता ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होना पुलिस की घोर लापरवाही को दर्शाता है। प्रथम दृष्टया यह मामला दुर्घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या का प्रतीत होता है।

अदालत ने सभी तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए मोतीपुर थाना को तत्काल एफआईआर दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच करने का आदेश दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।