पटना से दिल्ली तक हलचल: 5वीं सीट पर फंसा गणित, नीतीश कुमार के पत्ते खोलने का इंतजार

  • Post By Admin on Feb 27 2026
पटना से दिल्ली तक हलचल: 5वीं सीट पर फंसा गणित, नीतीश कुमार के पत्ते खोलने का इंतजार

पटना : आगामी 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पांच सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी महागठबंधन के बीच कड़ी रणनीतिक लड़ाई देखने को मिल रही है।

संख्या बल के आधार पर दो सीटें जनता दल (यूनाइटेड) और दो सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में जाती दिख रही हैं। ऐसे में पांचवीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। महागठबंधन की अगुवाई कर रही राष्ट्रीय जनता दल के पास 25 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस और वामदलों को मिलाकर यह संख्या 35 तक पहुंचती है। फिर भी जीत के लिए उसे छह अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी, जो एआईएमआईएम और बसपा के एकमात्र विधायकों के समर्थन से संभव हो सकता है। समर्थन नहीं मिलने की स्थिति में विपक्ष के लिए इस चुनाव में सूपड़ा साफ होने का खतरा बना हुआ है।

जेडीयू में ‘तीसरी पारी’ पर मंथन

दूसरी ओर जेडीयू के सामने भी दुविधा है। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को तीसरी बार मौका दिया जाए या नहीं, इस पर मंथन जारी है। पार्टी की परंपरा तीसरी बार राज्यसभा भेजने के पक्ष में नहीं रही है, लेकिन इन नेताओं की राजनीतिक विरासत को देखते हुए अपवाद की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह को दो कार्यकाल के बाद तीसरी बार राज्यसभा नहीं भेजा गया था, जबकि वे उस समय केंद्र सरकार में मंत्री थे। बाद में उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। ऐसे में मौजूदा निर्णय को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है।

बताया जा रहा है कि हरिवंश नारायण सिंह ने दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं से संपर्क साधा है, लेकिन अंतिम फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथ में माना जा रहा है।

भाजपा में भी अटकलें

यदि भाजपा के खाते में दो सीटें जाती हैं तो प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन को राज्यसभा भेजे जाने को लेकर भी चर्चाएं हैं। सवाल यह है कि वे बांकीपुर से विधायक बने रहेंगे या उच्च सदन का रुख करेंगे। पिछली बार भाजपा ने अपने तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को हिमाचल प्रदेश के बजाय गुजरात से राज्यसभा भेजा था। ऐसे में नितिन नवीन को बिहार से या किसी अन्य राज्य से भेजे जाने पर भी नजरें टिकी हैं।

उपेंद्र कुशवाहा की स्थिति

एनडीए के भीतर उपेंद्र कुशवाहा की भूमिका पर भी चर्चा है। उनके पुत्र दीपक प्रकाश को बिना विधायक या विधान पार्षद बने मंत्री बनाए जाने के बाद अब उन्हें विधान परिषद में समायोजित करने की चुनौती है। ऐसे में एनडीए के भीतर ‘परिवारवाद’ के मुद्दे पर भी संतुलन साधना आसान नहीं होगा।

कुल मिलाकर, राज्यसभा चुनाव को लेकर पटना से दिल्ली तक सियासी तपिश महसूस की जा रही है। पांचवीं सीट पर मुकाबला किसके पक्ष में जाता है और जेडीयू अपनी परंपरा में बदलाव करती है या नहीं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।