मुजफ्फरपुर में पीयूसीएल की विचार गोष्ठी, मानवाधिकार और लोकतंत्र पर हुई चर्चा
- Post By Admin on May 11 2026
मुजफ्फरपुर : रामदयालु सिंह महाविद्यालय में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) मुजफ्फरपुर इकाई के तत्वावधान में “मानवाधिकार, पीयूसीएल और हम” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पीयूसीएल बिहार राज्य इकाई के प्रमुख श्री नंदकिशोर ने संगठन की गतिविधियों और बिहार में उसके सांगठनिक विस्तार पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि पीयूसीएल नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लगातार कार्य कर रहा है। संगठन लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ दमनकारी कानूनों को वापस लेने और निरस्त करने के लिए संघर्ष करता है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में विशेष रूप से समाज के हाशिए पर रह रहे लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना भी पीयूसीएल की प्राथमिकताओं में शामिल है। निष्पक्ष और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण संगठन का मुख्य उद्देश्य है।
पीयूसीएल बिहार इकाई के सचिव श्री कृष्ण मुरारी ने कहा कि बिहार में संगठन को मजबूत करने का उद्देश्य नागरिक स्वतंत्रता, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि राज्य में पीयूसीएल की सक्रियता लगातार बढ़ रही है तथा छात्र और शिक्षकों का जुड़ाव भी तेजी से बढ़ा है। उन्होंने बताया कि संगठन मानवाधिकार उल्लंघन, नफरत फैलाने वाले भाषण, पुलिस ज्यादती, हिरासत में मौत तथा फर्जी मुठभेड़ों की जांच कर पीड़ितों को न्याय दिलाने का कार्य करता है। पीयूसीएल बिहार इकाई की उपाध्यक्ष प्रीति कुमारी ने कहा कि संगठन महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिंसा, हिरासत में यौन शोषण और महिलाओं से जुड़े गंभीर मामलों में पीयूसीएल जांच और हस्तक्षेप करता है, ताकि महिलाओं को हिंसा मुक्त और सम्मानपूर्ण जीवन मिल सके।
कार्यक्रम में पीयूसीएल मुजफ्फरपुर के अध्यक्ष प्रो. के.के. झा, शाहिद कमाल, प्रो. के.के. कौशिक, सुरेंद्र कुमार, सीनेट सदस्य प्रो. संजय कुमार सुमन, डॉ. नीरज मिश्रा, मुंद्रिका दास, महेश्वर प्रसाद बौद्ध, डॉ. ललित किशोर, रंजीत कुमार, विष्णुदेव यादव, मुजफ्फरपुर शांति सेना के संयोजक सोनू सरकार, सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक अनुसंधान फाउंडेशन के सचिव एवं कठपुतली कलाकार सुनील कुमार समेत कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन एवं विषय प्रवेश डॉ. एम.एन. रजवी ने किया।