विश्व पर्यावरण दिवस पर एल के सिंहानिया एजुकेशन सेंटर में वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का लिया गया संकल्प
- Post By Admin on Jun 06 2026
गोटन: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर औद्योगिक नगरी गोटन स्थित एल के सिंहानिया एजुकेशन सेंटर के विशाल एवं हरित परिसर में वृक्षारोपण समारोह एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं हरित जीवनशैली को अपनाने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर जेके व्हाइट सीमेंट वर्क्स, गोटन के यूनिट हेड डॉ. सचिन गुप्ता मुख्य अतिथि तथा टेक्निकल हेड राज कुमार बंसल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जेके व्हाइट सीमेंट वर्क्स के एचआर एवं एडमिन हेड मनीष तिवारी, सिविल हेड आर.के. सिंह, पर्यावरण संरक्षण विभाग के प्रमुख डॉ. रंजीत बागड़िया, विभागीय सदस्य सुधीर कुमार एवं अभय त्रिपाठी, सीएसआर लीड शिवेश कुमार मिश्रा, सेफ्टी हेड मुकेश पटेल, प्रोडक्शन हेड आयुष गोयल, सिक्योरिटी हेड रोहित मिश्रा तथा आईटीआई के प्राचार्य आशुतोष तिवारी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। वहीं एल के सिंहानिया एजुकेशन सेंटर की ओर से उप प्राचार्य प्रणय कुमार, बर्सर राहुल वानखेड़े, हेड पेस्टोरल केयर एंड डिसिप्लिन एम.एस. राठौड़, हेडमास्टर डॉ. ए.के. झा, विद्यालय परिवार के सदस्य, शिक्षकगण एवं उनके परिजन कार्यक्रम में शामिल हुए।
मुख्य अतिथि डॉ. सचिन गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि केवल वृक्षारोपण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए “7 आर” सिद्धांत—रिफ्यूज, रिड्यूस, रियूज, रिपेयर, रिपर्पज़, रिसाइकिल एवं रॉट—को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि लोग इन सिद्धांतों को अपने जीवन का हिस्सा बना लें तो समाज को स्वच्छ, हरित एवं प्रदूषण-मुक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने परिसर के भ्रमण के दौरान कहा कि प्रदूषण एवं कचरा-मुक्त वातावरण की शुरुआत उन वस्तुओं और आदतों को कम करने से होती है, जो अनावश्यक रूप से अधिक कचरा उत्पन्न करती हैं। साथ ही उन्होंने परिसर में अधिकाधिक गार्डन एवं हरित क्षेत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका संदेश उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणादायक एवं विचारोत्तेजक रहा।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए उप प्राचार्य प्रणय कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवनदायिनी माता के रूप में देखा गया है। हमारे ऋषियों ने वृक्षों, नदियों और पर्वतों के प्रति श्रद्धा एवं संवेदनशीलता का भाव विकसित किया। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधों की सेवा वास्तव में ईश्वर की सेवा है और आज पर्यावरण संरक्षण सम्पूर्ण मानवता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन चुका है। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का वृक्षारोपण किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए परिसर को स्वच्छ, हरित, प्रदूषण-मुक्त एवं कचरा-मुक्त बनाए रखने का प्रण लिया। उत्साह, सहभागिता और पर्यावरण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।