गेमिंग की दुनिया में घुसपैठ : आतंकी नेटवर्क की नजर मासूम बच्चों पर
- Post By Admin on Feb 22 2026
जयपुर : डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। राजस्थान साइबर सेल की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कुछ आतंकी संगठन लोकप्रिय ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए 11 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, Roblox, Minecraft और Discord जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय संदिग्ध तत्व पहले बच्चों से दोस्ती करते हैं और फिर धीरे-धीरे उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क एक सुनियोजित रणनीति के तहत काम करता है।
केंद्रीय एजेंसियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, सैंडबॉक्स गेम्स, जहां ओपन चैट और स्वतंत्र संवाद की सुविधा होती है, वहां बच्चों को टारगेट किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को तीन चरणों वाली ‘फनल स्ट्रैटेजी’ बताया गया है। पहले चरण में गेमिंग चैट के माध्यम से संपर्क स्थापित किया जाता है। दूसरे चरण में निजी चैट पर ले जाकर छोटे-छोटे टास्क दिए जाते हैं। तीसरे चरण में बड़े मिशन के नाम पर बच्चों को मानसिक रूप से प्रभावित कर उन्हें अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की जाती है।
इस मामले को लेकर पुलिस प्रशासन ने अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। साइबर सेल के डीआईजी विकास कुमार ने कहा है कि माता-पिता को बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों द्वारा उपयोग किए जा रहे ऐप्स और ऑनलाइन संपर्कों की नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।
वहीं, इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि बदलते डिजिटल दौर में बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम चिंता का विषय है। उन्होंने आशंका जताई कि हिंसक और भ्रामक कंटेंट बच्चों की मानसिकता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने अभिभावकों से संवाद बढ़ाने और बच्चों को सही दिशा देने की अपील की।
एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करना, पेरेंटल कंट्रोल का उपयोग करना और परिवार में खुला संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और निगरानी के माध्यम से ही बच्चों को इस तरह के संभावित डिजिटल खतरे से बचाया जा सकता है।