मधुबन में विश्व संस्कृत दिवस की पूर्व संध्या पर संस्कृत संगोष्ठी, वैश्विक प्रभाव पर हुई चर्चा

  • Post By Admin on Aug 27 2026
मधुबन में विश्व संस्कृत दिवस की पूर्व संध्या पर संस्कृत संगोष्ठी, वैश्विक प्रभाव पर हुई चर्चा

मुजफ्फरपुर: राजकीय डिग्री महाविद्यालय, मधुबन में विश्व संस्कृत दिवस की पूर्व संध्या पर संस्कृत विभाग की ओर से एकदिवसीय संस्कृत संगोष्ठी आयोजित की गई। ‘संस्कृतस्य महत्त्वम् तत् वैश्विक प्रभावः’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) ब्रह्मचारी व्यास नन्दन शास्त्री ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चारण के साथ दीप प्रज्वलन से हुई। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि रामेश्वर महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) महेश्वर प्रसाद सिंह ने संस्कृत भाषा के ऐतिहासिक एवं वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्व की प्राचीन और समृद्ध भाषाओं में से एक है तथा संस्कृत साहित्य में रचित श्लोकों एवं ग्रंथों के विचारों का व्यापक प्रभाव रहा है। उन्होंने रामायण, महाभारत, कालिदास के ‘मेघदूत’ और चाणक्य नीति का उल्लेख करते हुए इनके साहित्यिक एवं जीवनोपयोगी संदेशों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि संस्कृत का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए रोजगार एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के क्षेत्र में भी अनेक अवसर हैं। संस्कृत के श्लोकों में निहित विश्व बंधुत्व की भावना को जीवन में अपनाना प्रत्येक व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) ब्रह्मचारी व्यास नन्दन शास्त्री ने संस्कृत भाषा की विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि संस्कृत अपनी गरिमा, संरचना और गुणवत्ता के कारण विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान रखती है। उन्होंने संस्कृत की सरलता और कंप्यूटर के लिए इसकी अनुकूलता का भी उल्लेख किया।

प्राचार्य ने बताया कि चारों वेद, उपनिषद, षड्दर्शन, वेदांग सहित भारतीय ज्ञान परंपरा के अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में रचे गए हैं। रामायण, महाभारत, गीता, पुराण और संस्कृत व्याकरण से जुड़े अनेक ग्रंथ भी संस्कृत साहित्य की समृद्ध परंपरा को दर्शाते हैं। उन्होंने पाणिनि, कात्यायन और पतंजलि के योगदान की चर्चा करते हुए संस्कृत भाषा और साहित्य के वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला। साथ ही विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों को संस्कृत के अध्ययन के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन गणित विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संतोष कुमार साह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन राजनीति विज्ञान के सहायक अध्यापक डॉ. राकेश कुमार राम ने किया। संगोष्ठी में महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।