प्रेरणा पर्व में गूंजा साहित्यिक स्वर, डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह के जन्मदिवस पर रचनाधर्मिता का सम्मान

  • Post By Admin on Jan 06 2026
प्रेरणा पर्व में गूंजा साहित्यिक स्वर, डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह के जन्मदिवस पर रचनाधर्मिता का सम्मान

मुजफ्फरपुर : कैप्टन निषाद सभागार में जागृति संस्थान, मुजफ्फरपुर के तत्वावधान में सोमवार को “प्रेरणा पर्व” के रूप में प्रख्यात कवि, नाटककार, कहानीकार, समीक्षक एवं संपादक डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह के 71वें जन्मदिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने भाग लिया और डॉ. सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से विचार रखे।

अध्यक्षीय संबोधन में बी.आर.ए. बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामप्रवेश सिंह ने कहा कि डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह केवल सिद्ध साहित्यकार ही नहीं, बल्कि एक साहित्यिक गुरु भी हैं, जिन्होंने अपनी रचनाशीलता से अनेक साहित्यकारों को दिशा दी है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. रामेश्वर द्विवेदी ने कहा कि डॉ. सिंह ने अपनी व्यक्तिगत पीड़ाओं को साहित्य में जीया है। ललित नारायण मिश्र मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र साह ने उन्हें आजीवन साहित्य साधक बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में अनेक विमर्शों की समृद्ध परंपरा दिखाई देती है।

एम.पी. साइंस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अमरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि डॉ. सिंह ने ईमानदारी, तत्परता और कठोर परिश्रम से असंभव को संभव कर दिखाया है और मौलिक, अनूदित व संपादित रचनाओं से साहित्य को समृद्ध किया है।

डॉ. पुष्पा गुप्ता ने उनके रचनात्मक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी कृतियां स्वयं बोलती हैं और उन पर गंभीर शोध की आवश्यकता है। वहीं, डॉ. रामेश्वर राय ने उन्हें “लेखकीय प्रेरणा का प्रदीप” बताया।

रचनाधर्मिता पर आलेख पाठ

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह की रचनाधर्मिता पर केंद्रित आलेख पाठ हुआ। विभिन्न विद्वानों ने उनके काव्य, कथा, नाटक और विमर्शपरक रचनाओं पर अपने आलेख प्रस्तुत किए। इनमें “डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह का रचना-संसार”, “नारी विमर्श”, “भूख की शाश्वतता”, “अक्षयवट: एक अप्रतिम नाट्य प्रयोग”, “स्त्री विमर्श में हस्तक्षेप”, “पहचान: एक विश्लेषण” और “कृषक वेदना” जैसे विषय शामिल रहे।

कवि सम्मेलन में गूंजा साहित्यिक स्वर

“प्रेरणा पर्व” के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर ग़ज़ल, गीत और कविताओं का सस्वर पाठ हुआ। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामेश्वर द्विवेदी ने की, जबकि मंच संचालन डॉ. पंकज कर्ण ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत, माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और स्वस्ति पाठ के साथ हुआ। साहित्यिक वातावरण में आयोजित इस समारोह ने डॉ. राजेश्वर प्रसाद सिंह के रचनात्मक अवदान और प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व को श्रद्धापूर्वक रेखांकित किया।