लखीसराय में बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट, 46 नावें और 6 मोटरबोट तैनात
- Post By Admin on Sep 09 2026
लखीसराय : गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लखीसराय जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिले के संवेदनशील इलाकों में संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ संबंधित विभागों और अधिकारियों को लगातार स्थिति की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। जिला प्रशासन की ओर से यह जानकारी 8 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई।
बड़हिया, लखीसराय, पिपरिया और सूर्यगढ़ा अंचल को संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। इन चार अंचलों में करीब 1,49,516 की आबादी को ध्यान में रखते हुए राहत और बचाव के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। 8 सितंबर को बिहार सरकार के कृषि मंत्री ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर अधिकारियों के साथ समीक्षा की। हाथीदह में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 1.63 मीटर ऊपर दर्ज किया गया है। हालांकि, फिलहाल जलस्तर में कमी की प्रवृत्ति बनी हुई है। संवेदनशील तटबंधों और स्थानों पर बालू से भरे बोरे लगाकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। आपात स्थिति में राहत एवं बचाव और आवागमन के लिए जिले में 46 नावें उपलब्ध करायी गयी हैं। इनमें NDRF और SDRF की छह मोटरबोट भी शामिल हैं।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए छह सामुदायिक रसोई और दो आश्रय स्थल संचालित किए जा रहे हैं। इन सामुदायिक रसोई के जरिए अब तक 4,681 लोगों को भोजन कराया गया है। जलभराव और बारिश से बचाव के लिए प्रभावित परिवारों के बीच 14,500 पॉलीथिन शीट वितरित की जा चुकी हैं। इसके अलावा 1,650 फूड पैकेट बांटे गए हैं, जबकि एक हजार अतिरिक्त फूड पैकेट तैयार किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है। प्रभावित इलाकों में 27 चिकित्सा केंद्रों के माध्यम से अब तक 11,939 लोगों का उपचार किया गया है। बड़हिया और पिपरिया में मोबाइल मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है। प्रशासन के पास विभिन्न प्रकार की 122 मानव दवाएं उपलब्ध हैं। गर्भवती महिलाओं की भी विशेष निगरानी की जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में 216 गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया गया है, जिनमें 77 महिलाओं का प्रसव अगले दो माह में संभावित है।
पशुओं के लिए भी प्रशासन ने व्यवस्था की है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में 419 क्विंटल पशुचारा उपलब्ध कराया गया है। पशुओं के इलाज और देखभाल के लिए चार चलंत पशु चिकित्सा दल सक्रिय हैं। इन दलों के माध्यम से अब तक 175 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। जिला प्रशासन ने राहत सामग्री, नावों, चिकित्सा टीमों, सामुदायिक रसोई और आश्रय स्थलों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने और आवश्यकता के अनुसार तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने को कहा गया है। प्रशासन का कहना है कि संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी रखी गई हैं और प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।