लोक संस्कृति कभी नष्ट नहीं होती, पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती है : उषा किरण
- Post By Admin on Jun 05 2026
मुजफ्फरपुर: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित सांस्कृतिक संगोष्ठी एवं लोक कला-लोक संस्कृति आधारित कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार को बिहार बाल भवन किलकारी में अभिनन्दन मुजफ्फरपुर के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वर्णिम कला केन्द्र की संस्थापिका एवं संस्कृतिकर्मी उषा किरण श्रीवास्तव ने की। आयोजन में लोक संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों को गीत, नाटक और नृत्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उषा किरण श्रीवास्तव ने कहा कि लोक संस्कृति कभी समाप्त नहीं होती, बल्कि वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती है। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति में जीवन की सरलता, सहजता और स्वाभाविकता समाहित होती है, जो समाज को उसकी जड़ों से जोड़े रखती है। कार्यक्रम के दौरान सुनील कुमार के निर्देशन में “दोस्ती” नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से पर्यावरण के प्रति दोस्ताना दृष्टिकोण अपनाने और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया। नाटक में चंदेश्वर राम, खुशबू कुमारी उर्फ प्रमिला देवी, श्वेता यादव, अनिता कुमारी, शिव कुमार और विकास कुमार ने प्रभावशाली अभिनय कर दर्शकों की सराहना बटोरी। वहीं बिहार बाल भवन किलकारी, मुजफ्फरपुर के बच्चों—पल्लवी, आराध्या, परी, आस्था रंजन, कृतिका, तहरीम, वैष्णवी अग्रवाल, वैमवी, त्रिदित्या, श्रेया, स्वाधा रोशनी, आर्यन, प्रतीक, प्रियांशु और कुंज—ने पर्यावरण विषय पर आधारित भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोक गायक कलाकार सुनील कुमार ने “आम लगाव हो, लीची लगाव, औरो लगाव मीठ जमुनिया” तथा “जल जीवन हरियालिया, स्वच्छ पानी से रहेला उमर भर जवानी” जैसे गीतों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बचाने का संदेश दिया। वहीं लोक गायिका अनिता कुमारी ने भोजपुरी के प्रसिद्ध गीत “सुन्दर सुभूमि भईया भारत के देशवा” और “अमवा महुआ के झूमे डलिया” प्रस्तुत कर लोक संस्कृति की मिठास से वातावरण को सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष प्रफुल्ल चंद्र मिश्रा, अविनाश कुमार, अरुण कुमार, सोनू सरकार, शम्भु मोहन प्रसाद, सीआरपी कमीशनरी रिसोर्स पर्सन पूर्णिमा बाला, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी रश्मि आनंद, चंद्रभूषण प्रसाद, गोपाल फलक, कायनात आफरीन, सीमा कुमारी, गौरीशंकर मिश्रा, अरुणिमा, अमन राज, सोनू कुमार, सौरभ कुमार, सुजाता कुमारी, रूपा पाठक, राजू सहनी, आशीष राज, बब्लू कुमार, राजीव कुमार, अर्पिता कुमारी, कृष्णनंदन कुमार एवं प्रियंका चौधरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। संगोष्ठी का संचालन अनिल कुमार ठाकुर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अभिनन्दन संस्थान के सचिव प्रभात कुमार द्वारा किया गया।