बच्चों के सर्वांगीण विकास में कठपुतली कला की भूमिका पर हुआ संवाद

  • Post By Admin on Feb 09 2026
बच्चों के सर्वांगीण विकास में कठपुतली कला की भूमिका पर हुआ संवाद

मुजफ्फरपुर: बच्चों के व्यक्तित्व के चहुँमुखी विकास में कठपुतली कला की भूमिका को रेखांकित करते हुए सोमवार को मालीघाट में कठपुतली संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता संस्थान के संयोजक एवं वरिष्ठ कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुनील कुमार ने बताया कि विश्व कठपुतली दिवस प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का विचार ईरान के प्रसिद्ध कठपुतली थिएटर कलाकार जावद ज़ोल्फ़ागरी ने प्रस्तुत किया था, जिसे वर्ष 2000 में जर्मनी के मैगडेबर्ग में आयोजित यूनियन इंटरनेशनेल डे ला मैरियोनेट के 18वें कांग्रेस में चर्चा के लिए रखा गया था। सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान की संरक्षक कांता देवी ने कठपुतली कला की पौराणिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए देवों के देव महादेव ने काष्ठ मूर्ति में प्रवेश कर कठपुतली कला की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि यह कला भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की एक महत्वपूर्ण धरोहर है।

लोक गायिका अनिता कुमारी ने कहा कि भारत कठपुतली कला की मातृभूमि होने के बावजूद आज आम जनमानस, विशेषकर नई पीढ़ी, इस अद्भुत कला से दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि समय के साथ कठपुतली कला में कई परिवर्तन आए हैं और पिछले पचास वर्षों में पुतुल खेल और पुतुल रंगमंच के नए कलाकार सामने आए हैं, जिन्होंने इस विधा को नए आयाम दिए हैं। अनिल कुमार ठाकुर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कठपुतली के माध्यम से बच्चों में सृजनात्मकता का विकास होता है और उनमें जानने-समझने की जिज्ञासा बढ़ती है। पुतलियों के निर्माण और उनके जरिए विचारों के संप्रेषण की प्रक्रिया बच्चों को आनंद देती है और यह उनके सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होती है।

कार्यक्रम में स्वेता कुमारी, शिव कुमार, गोलू कुमार, चंदेश्वर राम, महेश्वर पासवान, खुशबू कुमारी, आदित्य सुमन, विवेकानंद उर्फ नंदू, कमलेश कुमार, दीपू कुमार और बबिता ठाकुर सहित कई लोग उपस्थित रहे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने किया। उन्होंने बताया कि सरला श्रीवास की पुण्यतिथि 21 मार्च को विश्व कठपुतली दिवस के रूप में मनाई जाएगी।